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किसानों ने किया कमाल, बिहार में शुरु कर दी स्ट्रॉबेरी की खेती

बेगूसराय,15 नवम्बर (उदयपुर किरण). बिहार की औद्योगिक राजधानी के नाम से मशहूर बेगूसराय जिले के किसान, वैज्ञानिक दावों के उलट भी नित नए प्रयोग कर रहे हैं. इन्हीं प्रयोगों की कड़ी में एक और नया अध्याय जुड़ गया है स्ट्रॉबेरी.

किसानों का यह प्रयोग सफल रहा तो अगले साल से बेगूसराय में एक सौ एकड़ से अधिक जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती होगी. फिलहाल प्रायोगिक तौर पर बेगूसराय जिले मेेंं चार अलग-अलग प्रकार की जमीन पर 28 अक्टूबर को स्ट्रॉबेरी के बाइस सौ पौधे लगाए गए हैंं जिसमें से करीब बारह प्रतिशत सूख गए हैं तथा शेष पौधे बढ़ रहे हैैं. उत्पादन सफल रहा तो अगले सीजन से बेगूसराय की एक सौ एकड़ से अधिक जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती होगी. उत्पादन सही होने पर केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने भी स्ट्रॉबेरी के प्लांटेशन लैब की व्यवस्था बिहार में ही करने का आश्वासन दिया है.

फिलहाल भारत के पूना में स्ट्रॉबेरी की खेती हो रही है तथा वहीं से पौधा मंगाया गया है. एक हजार पौधे लगाने वाले बखरी शकरपुरा के प्रगतिशील किसान कृष्णदेव राय ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों की किस्मत बदल सकती है. एक एकड़ की खेती में करीब तीन लाख की लागत आती है जबकि मिडिल एवरेज में भी फल लग गया तो कम से कम बारह से पंद्रह लाख तक की बचत होगी. उन्होंने बताया कि कैलिफोर्निया से आए मादा प्लांट को पूना में विकसित कर वहां व्यापक पैमाने पर खेती की जा रही है. वहीं से हवाई जहाज के माध्यम से बाइस सौ पौधे मंगवाकर बेगूसराय में लगाए गए हैंं जिसमें से एक हजार पौधे हमने लगाए हैंं जबकि एक हजार पौधे मटिहानी के किसान विनय कुमार सिंह तथा दो सौ पौधे आधारपुर के किसान सोनू आनंद एवं उनके एक दोस्त ने लगाए हैंं. फिलहाल दस-बारह प्रतिशत पौधे सूख गए हैंं तथा बाकी पौधों मेंं मात्र 15 दिन में दो प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुुई है.

कृष्णदेव राय ने बताया कि मुनाफे की इस खेती पर फिलहाल पूना का एकाधिकार है तथा भारत में सर्वाधिक खेती वहीं होती है. साइंटिस्टों का कहना है कि बिहार की जलवायु एवं मिट्टी स्ट्रॉबेरी के लिए अनुकूल नहीं है लेकिन बेगूसराय के हम किसान प्रयोगधर्मी हैंं तथा इसे हर हालत में उपजा कर जनवरी में फल केंद्रीय कृषि मंत्री तक पहुंचाएंगे. उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी का पौधा मात्र एक फीट ऊंचा होता है तथा 70 से 80 दिन में तैयार हो जाता है. यह फल अगले 80 से 90 दिनों तक तोड़ा जाता है. प्रति पौधा न्यूनतम एक किलो फल भी निकलता है तो एक सीजन में एक एकड़ जमीन पर 250 क्विंटल स्ट्रॉबेरी तैयार होगा. कम से कम एक सौ पचास रुपये प्रति किलो बिक्री होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अच्छे दिन की बातें कही है. किसान सही तरीके से नए -नए प्रयोग कर नई किस्म की खेती करें तो एक साल-पांच साल नहीं, मात्र छह महीने में किसानों के अच्छे दिन आ जाएंगे.

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