
गुवाहाटी, 10 मार्च: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को घोषणा की कि भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने 2021 से चाय बागान श्रमिकों के वेतन में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है. उन्होंने पूर्व कांग्रेस सरकारों पर दशकों तक इन श्रमिकों की अनदेखी करने का आरोप लगाया.
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राज्य सरकार चाय बागान श्रमिकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए उच्च वेतन और अन्य कल्याणकारी उपायों पर काम कर रही है.
सरमा ने लिखा कि अंतर स्पष्ट है. भाजपा सरकार ने 2021 से चाय श्रमिकों के वेतन में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है, जबकि कांग्रेस सरकारों ने उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया.
वेतन में नए संशोधन के तहत, चाय बागान श्रमिकों की दैनिक मजदूरी में 30 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. अब ब्रह्मपुत्र घाटी के श्रमिकों को 280 रुपये प्रतिदिन और बराक घाटी के श्रमिकों को 258 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे.
सरमा ने कहा कि यह वेतनवृद्धि चाय बागान श्रमिकों के योगदान को सम्मानित करने के लिए सरकार के प्रयासों का हिस्सा है. उन्होंने बागान श्रमिकों को असम के चाय उद्योग की रीढ़ बताया.
सरकार ने चाय श्रमिक समुदाय को सम्मान देते हुए उनकी दैनिक मजदूरी बढ़ाई है और उनके परिश्रम को मान्यता देने का प्रयास जारी रखा है. मजदूरी में वृद्धि के अलावा, सरमा ने कहा कि सरकार ने चाय बागान समुदायों के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों के समाधान के लिए भी कदम उठाए हैं.
सरकार ने चाय बागान श्रमिकों की आजीविका सुधारने के लिए भूमि अधिकार प्रदान करने, आरक्षण लाभ उपलब्ध कराने और चाय बागान क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं.
असम सरकार की इन पहलों का उद्देश्य चाय बागान समुदाय द्वारा झेले जा रहे ‘ऐतिहासिक अन्याय’ को दूर करना है.
असम में चाय बागान श्रमिकों की एक बड़ी आबादी है, जो राज्य के बड़े चाय उद्योग में कार्यरत है. यह उद्योग अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और कई जिलों में लाखों लोगों के लिए आजीविका का साधन है.