
कोलकाता, 14 मार्च: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं. चुनाव आयोग और सभी राजनीतिक दल चुनावी रणनीतियों में जुट गए हैं. आयोग ने पश्चिम बंगाल का दौरा कर चुनाव की स्थिति का आकलन किया है. इस बीच, दक्षिण 24 परगना जिले में मथुरापुर लोकसभा की 7 विधानसभा सीटों की स्थिति पर नजर डालते हैं.
मथुरापुर लोकसभा क्षेत्र टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है. यहां सभी 7 विधानसभा सीटों पर पार्टी का स्पष्ट प्रभाव है. इस क्षेत्र में मछुआरा समुदाय, दलित और ग्रामीण मतदाता बहुलता में हैं. भाजपा ने 2019 और 2024 के चुनावों में अपने प्रदर्शन में सुधार किया, लेकिन तृणमूल कांग्रेस से पीछे रही. वामपंथी सीपीआईएम और कांग्रेस का प्रभाव काफी कम हो गया है.
मथुरापुर लोकसभा में पथरप्रतिमा, काकद्वीप, सागर, कुलपी, रायदीघी, मंदिरबाजार (आरक्षित) और मगरहाट पश्चिम विधानसभा सीटें शामिल हैं. वर्तमान में इन सभी सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है. पिछले चुनाव में भाजपा कुछ सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी.
पथरप्रतिमा विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व है. पिछले तीन विधानसभा चुनावों से समीर कुमार जाना इस सीट पर विजेता बने हैं. काकद्वीप विधानसभा सीट पर भी एआईटीसी का दबदबा है. मंतुरम पखीरा ने पिछले तीन चुनावों में जीत दर्ज की है. 2021 में उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी को 25 हजार वोटों से हराया.
सागर विधानसभा सीट राज्य की महत्वपूर्ण सीटों में से एक है. 2011 से लगातार एआईटीसी के बंकिम चंद्र हजारा यहां जीतते आ रहे हैं. उन्होंने पिछले चुनाव में भाजपा के बिकास कामिला को 30 हजार वोटों से हराया. रायदीघी विधानसभा क्षेत्र सुंदरबन में आता है, जहां मतदाता संख्या 2.6 लाख है. यहां मछली पालन और कृषि प्रमुख आय का साधन हैं.
मंदिरबाजार एक अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट है. 1977 से यहां तृणमूल कांग्रेस का दबदबा है. जॉयदेब हल्दर लगातार तीन बार से विधायक बने हैं. मगरहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का गठन 1951 में हुआ था. यहां तृणमूल कांग्रेस ने 2011 के बाद से लगातार जीत हासिल की है.
मगरहाट पश्चिम में 2024 में 238,944 रजिस्टर्ड वोटर थे, जो पिछले चुनावों की तुलना में बढ़े हैं.
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