
नई दिल्ली, 14 फरवरी: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इम्ताथुल्लाह नामक आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है. उस पर रामलिंगम हत्या मामले में शामिल हमलावरों और साजिशकर्ताओं को पनाह देने का आरोप है.
मार्च 2019 में, प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्यों ने रामलिंगम की निर्मम हत्या की थी. इस घटना ने तमिलनाडु में सांप्रदायिक सौहार्द और शांति को खतरे में डाल दिया.
हमले के तुरंत बाद, एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी. अब एजेंसी ने तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के निवासी इम्ताथुल्लाह के खिलाफ चेन्नई के पूनामल्ली स्थित विशेष एनआईए अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है.
एनआईए के अनुसार, आरोपी ने यह जानते हुए भी कि हमलावर और साजिशकर्ता हत्या में शामिल थे, उन्हें शरण दी. यह हत्या तमिलनाडु के तिरुभुवनम में सांप्रदायिक तनाव और आतंक फैलाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी. जांच में पता चला कि इम्ताथुल्लाह ने फरार घोषित अपराधियों को लगभग छह साल तक छिपाकर रखा.
5 फरवरी 2019 को रामलिंगम पर जानलेवा हमला हुआ था. उस दिन, पीएफआई के सदस्य पक्कु विनायकम थोपु इलाके में जबरन धर्म परिवर्तन में लगे थे. रामलिंगम ने इसका विरोध किया, जिससे विवाद हुआ. इसके बाद, उसी दिन पीएफआई ने उनकी हत्या की साजिश रची और हमला कर दिया.
अगस्त 2019 में, एनआईए ने इस मामले में 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था. इनमें से छह आरोपी फरार थे और उन्हें घोषित अपराधी करार दिया गया था.
2021 में, एनआईए ने एक फरार आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि आगे की जांच में 2025 में तीन और आरोपियों को पकड़ा गया. जांच में सामने आया कि इन तीनों फरार आरोपियों को इम्ताथुल्लाह ने कोडाइकनाल के अंबूर बिरयानी रेस्टोरेंट में शरण दी थी. इम्ताथुल्लाह को अगस्त 2025 में गिरफ्तार किया गया.
एनआईए ने 2025 में बाकी फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया है और अब भी प्रतिबंधित पीएफआई से जुड़े अन्य लोगों और साजिशकर्ताओं की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाने के प्रयास जारी हैं.