
मुंबई, 22 फरवरी: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को विपक्षी महा विकास आघाड़ी (एमवीए) को चुनौती दी कि वह सरकार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को राज्य विधानमंडल में बजट सत्र के दौरान साबित करे.
कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, शिंदे ने विपक्ष की आलोचना की और कहा कि उन्हें विधानसभा के बाहर आरोप लगाने के बजाय सदन में मुद्दे उठाने चाहिए.
उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष के पास भ्रष्टाचार या प्रशासनिक लापरवाही के ठोस सबूत हैं, तो उन्हें विधानमंडल में पेश करना चाहिए, जहां औपचारिक चर्चा हो सके.
शिंदे ने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा और विधान परिषद दोनों में आधिकारिक रूप से नेता प्रतिपक्ष नियुक्त नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति का निर्णय विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति करेंगे, जिसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास और जनकल्याण योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है. उन्होंने ‘माझी लाडकी बहिन’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का कामकाज सदन में होने वाली चर्चा में खुद साबित हो जाएगा.
शिंदे ने नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की भी आलोचना की और कहा कि ऐसे कदम देश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं.
मुलुंड में निर्माणाधीन मेट्रो स्थल पर हाल ही में खंभा गिरने की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने तुरंत कार्रवाई की. संबंधित कार्यकारी अभियंता को निलंबित किया गया और चल रही सभी परियोजनाओं का सुरक्षा ऑडिट कराने का आदेश दिया गया.
उन्होंने बताया कि हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों को पूरा इलाज देने की घोषणा की गई है. इसके साथ ही, एमएमआरडीए ने अतिरिक्त 15 लाख रुपए मुआवजा देने की भी घोषणा की है.
शिंदे ने कहा कि 2026-27 का आगामी बजट जनकल्याण और विकास पर केंद्रित होगा, जिससे राज्य के नागरिकों को लाभ मिलेगा.