
रांची, 27 फरवरी: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन, ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और पंचायती राज विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई. ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता गांवों के समग्र विकास पर है. उनका लक्ष्य गांवों की तकदीर और तस्वीर बदलना है.
मंत्री ने इस वर्ष लागू हुए पेसा कानून को आदिवासियों के लिए “सुरक्षा कवच” बताते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ग्रामसभा को सशक्त बनाना आवश्यक है. ग्रामसभा को गांव का वास्तविक मालिक बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं. सहायक सचिव के पदों पर महिलाओं को प्राथमिकता देने की भी घोषणा की गई.
मनरेगा के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि इस वर्ष 12 करोड़ मानव दिवस के लक्ष्य के विरुद्ध 10 करोड़ मानव दिवस का सृजन किया गया है. उन्होंने केंद्र पर बकाया राशि रोके जाने का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि मनरेगा की हजारों करोड़ रुपये की राशि लंबित है.
अबुआ आवास योजना के तहत 1.90 लाख आवास पूर्ण होने की जानकारी देते हुए उन्होंने विभिन्न किस्तों के भुगतान का ब्योरा दिया. मंत्री ने स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि 2.72 करोड़ पौधे महिला समूहों द्वारा लगाए गए हैं.
विपक्ष की ओर से भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बजट खर्च की गति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास विभाग को 9,500 करोड़ रुपये मिले, लेकिन जनवरी 2026 तक केवल 367 करोड़ रुपये ही खर्च हुए.
प्रदीप प्रसाद ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों के यहां छापेमारी में बड़ी मात्रा में नकदी और महंगी वस्तुएं मिली हैं. विधायक जयराम महतो ने गांव-शहर की खाई पाटने की जरूरत बताई और सड़क-पुल निर्माण में जन फीडबैक तथा पारदर्शिता बढ़ाने के सुझाव दिए.
कांग्रेस के सुरेश बैठा और सीपीआई एमएल के चंद्रदेव महतो ने भी पेसा कानून में सुधार, ग्रामसभा को मजबूत करने और लंबित योजनाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दिया. चर्चा के दौरान सरकार ने ग्रामीण विकास को प्राथमिकता बताते हुए अपनी उपलब्धियां गिनाईं, वहीं विपक्ष ने बजट उपयोग, पारदर्शिता और कार्यान्वयन को लेकर सरकार को घेरा.