अमरूद व पपीते के पौधों का वितरण कृषकों को वितरण

उदयपुर (Udaipur). अनुसंधान निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (Udaipur) की अखिल भारतीय समन्वित फल परियोजना के अन्तर्गत, मदार गावं में अमरूद व पपीते के पौधों का वितरण कृषकों को फल बाड़ी लगाने हेतु किया गया.

इस अवसर पर डॉ. नरेन्द्र सिंह राठौड़, कुलपति, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (Udaipur) ने कहा कि कृषकों को शिक्षा, स्वच्छता व स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए. कोरोना महामारी (Epidemic) के दौर में जनसमूह के भोजन की व्यवस्था में कृषकों का अभूतपूर्व योगदान रहा है. समाज में इस विपिŸा के समय में कृषकों ने अपने भण्डार के द्वार जनमानस के लिए उन्मुक्त हृदय से खोल दिए. साथ ही उन्होंने बताया कि एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने से नवयुवकों में कृषि में विश्वास भाव जागृत होगा जिससे वे कृषि में ही रोजगार की संभवानाएँ देखेगें एवं इसे नवीन व्यवसाय के रूप में आजीविका के साधन के रूप में अपनाएगें. कुलपति महोदय ने अमरूद व पपीते के फलों से मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा की.

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विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक ड़ॉं. अभय कुमार महता ने अपने सम््बोधन में बताया कि उद्यानिकी फसलों का समावेश कर कृषक सामान्य से अधिक लाभ आसानी से कमा सकते है साथ ही अपनी भोजन थाली में फलों का समावेश कर सकते हैं. विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा ड़ॉं. एस. एल. मून्दड़ा ने अपने सम््बोधन में बताया कि फलों के बगीचे परम्परागत फसलों की तुलना में अधिक रोजगार सृजन करते हैं. जिससे ग्राम में रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं.

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डॉं. शान्ति कुमार शर्मा, क्षेत्रीय अनुसन्धान निदेशक ने बताया कि अपनी जोत का लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्रफल हमें फल तथा सब्जी की फसलों के लिए सुरक्षित रखना चाहिए. साथ ही कृषकों को अपने फार्म पर उपलब्ध पशुधन व जल का सदुपयोग जैविक खेती के लिए करना चाहिए तथा जैविक उत्पादों को उच्चŸार कीमत पर बेच कर किसान भाई अधिक लाभ कमा सकते हैं.

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परियोजना प्रभारी, डॉ. एस. एस. लखावत ने बताया कि परियोजना के घटक जनजाति उपयोजना के तहत एक कृषक को अमरूद तथा पपीता की बाड़ी लगाने के लिए उन्नत किस्म के 25 पौधे, एक स्प्रेमशीन, उर्वरक व दवाईयों का वितरण जनजाति किसानों में किया गया है. कोविड संक्रमण के मध्येनजर कृषकों को मास्क व सेनिटाइजर भी वितरित किए गए.

कार्यक्रम में एटीक प्रभारी डॉ. आई. जे. माथुर, विषेषाधिकारी डॉ. विरेन्द्र नेपालिया, एवं विŸानियत्रंक डॉ. संजय सिंह ने भी फलों की खेती पर अपने विचार प्रस्तुत किए. अतिथियों का आभार डॉं. विरेन्द्र सिंह, सहायक आचार्य द्वारा किया गया.

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