अहमदाबाद, समेत पांच शहरों में अब आकार ले सकेंगी 70 मंजिल से अधिक ऊंची इमारतें

अहमदाबाद (Ahmedabad). मुख्यमंत्री (Chief Minister) विजय रूपाणी ने अहमदाबाद (Ahmedabad), वडोदरा, सूरत (Surat), राजकोट और गांधीनगर सहित पांच महानगरों में अब सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर स्काई स्क्रेपर्स यानी गगनचुंबी इमारतों के निर्माण को मंजूरी देने का एक अनूठा कदम उठाया है. राज्य के महानगरों को आधुनिक शक्ल प्रदान कर विश्वस्तरीय शहरों के समकक्ष बनाने की दिशा में उन्होंने यह महत्वपूर्ण निर्णय किया है. राज्य में मौजूदा नियमों के अनुसार अधिकतम 22-23 मंजिला ऊंची इमारत ही बनाई जा सकती है. लेकिन अब मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने 70 से अधिक मंजिल की इमारतों और आइकोनिक स्ट्रक्चर्स के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है. मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने राज्य शासन का दायित्व संभाला तभी से योजनाबद्ध और विश्वस्तरीय शहरी विकास, स्मार्ट व सस्टेनेबल सिटी डेवलपमेंट के अनेक जनहितकारी निर्णय किए हैं, इसी दिशा में उन्होंने एक और मील का पत्थर स्थापित किया है.

रूपाणी ने महानगरों के व्यापक विकास के उद्देश्य से चार वर्ष के शासन के दौरान नगर नियोजन (टाउन प्लानिंग- टीपी) और विकास योजना (डीपी) की मंजूरी के दोहरे शतक के अंतर्गत 200 से अधिक टीपी स्कीम को मंजूरी दी है. अब, उन्होंने राज्य के इन पांच महानगरों की अनूठी पहचान पहचान खड़ी करने के मकसद से राज्य में लागू मौजूदा सामान्य जीडीसीआर-2017 (सामान्य विकास नियंत्रण नियमन) में ऊंची इमारतों के विनियमको सम्मिलित करने का निर्णय किया है. उल्लेखनीय है कि अहमदाबाद (Ahmedabad), सूरत (Surat), वडोदरा, राजकोट और गांधीनगर जैसे शहरों का राज्य के विकास और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में प्रमुख योगदान है. इतना ही नहीं, शहरी क्षेत्र में रोजगार के अवसर अधिक होने और ग्रामीण क्षेत्रों से स्थानांतरण तथा प्राकृतिक विकास की वजह से मकानों की मांग में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है जिससे जमीनों की कीमत भी बहुत बढ़ती जा रही है.

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इसके मद्देनजर शहर के नियोजित क्षेत्र की जमीन का अधिकतम उपयोग और अधिकाधिक लोगों को उसमें समाने के लिए वर्टीकल डेवलपमेंट आवश्यक है. इससे जमीनों की कीमतें कम होंगी और मकान सस्ते होने से आम आदमी के लिए किफायती मकान सुलभ हो सकेंगे. विकासोन्मुख दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने टॉल बिल्डिंग अर्थात गगनचुंबी इमारतों के निर्माण के लिए स्वीकृति देने का अहम निर्णय किया है. ऐसी इमारतों के लिए मुंबई (Mumbai) और दिल्ली जैसे शहरों के नियमों का अध्ययन करने के बाद नियमों का मसौदा तैयार किया गया है जिसमें स्ट्रक्चर सेफ्टी, फायर सेफ्टी और तकनीकी पहलुओं की मंजूरी के लिए मुंबई (Mumbai) की तर्ज पर विशेष तकनीकी समिति (एसटीसी) का गठन करने जैसे प्रावधानों का सुझाव दिया गया है.

राज्य में शहरी क्षेत्रों में हो रहे हर स्तर के ढांचागत विकास तथा रोजगार के अवसरों एवं लोक कल्याण के कारण बढ़ रही जमीन की कीमतों तथा तेजी से फैलते शहरों (अर्बन स्प्रॉल) को नियंत्रित करने के लिए युक्तिपूर्ण और नियमबद्ध योजना के जरिए हाई डेन्सिटी डेवलपमेंट की महती आवश्यकता है. मौजूदा विकास को ध्यान में रखते हुए ऐसी गगनचुंबी इमारतें (हाईराइज बिल्डिंग) गुजरात में भी बने इसके लिए राज्य सरकार (Government) ने पिछले कुछ समय के दौरान हुई कई उच्चस्तरीय बैठकों में गहन चर्चा और परामर्श करने के बाद इस निर्णय को अंतिम स्वरूप दिया है. मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने राज्य में ऊंची इमारतों के लिए जिन नियमों को मंजूरी दी है उसमें कई महत्वपूर्ण प्रावधान रखे गए हैं. जिसके अनुसार गगनचुंबी इमारत (टॉल बिल्डिंग) के ये प्रावधान 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों और जिन इमारत का आस्पेक्ट रेश्यो (न्यूनतम चौड़ाई और ऊंचाई का अनुपात) 1:9 या उससे अधिक हो उन पर लागू होंगे.

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कुल मिलाकर ये प्रावधान औडा (अहमदाबाद (Ahmedabad) शहरी विकास प्राधिकरण), सूडा (सूरत (Surat) शहरी विकास प्राधिकरण), वुडा (वडोदरा शहरी विकास प्राधिकरण), रुडा (राजकोट शहरी विकास प्राधिकरण) और गुडा (गांधीनगर शहरी विकास प्राधिकरण) जैसे डी-1 श्रेणी के प्राधिकरणों के ऐसे क्षेत्र में लागू होंगे जहां वर्तमान में सीजीडीसीआर के अनुसार बेज फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) 1.2 या उससे अधिक मिलने पात्र है. ऐसी ऊंची इमारतों केतकनीकी पहलुओं सहित अन्य जांच के लिए विशेष जांच समिति का गठन किया जाएगा. प्रस्तावित इमारत के लिए प्राधिकरण में आवेदन करने के बाद विशेष जांच समिति की ओर से इस संबंध में जांच और मंजूरी मिलने के बादआगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए योग्य प्राधिकार के पास भेज दिया जाएगा.

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30 मीटर या उससे अधिक चौड़ाई की डीपी, टीपी की सड़क होने पर मंजूरी मिलने पात्र होगी. वहीं, 100 से 150 मीटर ऊंची इमारत के लिए प्लॉट का न्यूनतम आकार 2,500 वर्गमीटर और 150 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारत के लिए प्लॉट का न्यूनतम आकार 3,500 वर्गमीटर होना चाहिए. नए नियमों के तहत अधिकतम एफएसआई 5.4 मिलने पात्र होगा जिसमें संबंधित जोन की बेज एफएसआई फ्री एसएफआई के रूप में और शेष एफएसआई प्रीमियम-चार्जेबल एफएसआई के तौर पर मिलेगी. प्रीमियम एफएसआई का शुल्क गैर-कृषि भूमि की जंत्री दर का 50 फीसदी होगा.

ऐसी इमारतें रिहायशी, व्यावसायिक या मनोरंजन या फिर इन तीनों के मिलेजुले उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. ऐसी इमारतों की पार्किंग में इलेक्ट्रिक चार्जिंग की सुविधा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए. इसके अलावा, विंड टनल टेस्ट भी अनिवार्य होगा और इमारत के लिए आपदा प्रबंधन योजना भी तैयार करनी होगी. मुख्यमंत्री (Chief Minister) के इस महत्वपूर्ण निर्णय के चलते राज्य के निर्माण और उससे जुड़े उद्योगों को नया बल मिलने से रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे. यही नहीं, बेमिसाल शहरी विकास की संकल्पना के साथ उत्तम से सर्वोत्तम की दिशा में गुजरात की यात्रा को रफ्तार मिलेगी.

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