आमदनी कर योग्‍य है या नहीं, भरनी होगी रिटर्न

नई दिल्‍ली . अगर कोई यह सोचता है कि उसकी आय कर योग्‍य नहीं है इसलिए आयकर रिटर्न भरने की जष्‍रत नहीं तो यह एक बड़ी गलती होगी. ऐसे व्‍रूक्ति को वर्ष 2020 के लिए आईटीआर (ITR) भरना ही पड़ेगा. सरकार ने कर चोरों को पकड़ने के लिए पिछले साल कुछ नई शर्तें जोड़ी थी. ऐसी स्थिति में अगर आपकी आमदनी कर देने लायक नहीं है, तब भी आपको IT रिटर्न फाइल करनी होगी.

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अगर आपकी सालाना कर योग्य आमदनी 2.5 लाख रुपये ( 60 साल की उम्र तक के लोगों के लिए), 3 लाख रुपये (60 से 79 साल) या 5 लाख रुपये (80 साल से अधिक) से कम है लेकिन आप किसी भी नई शर्त के दायरे में आते हैं तो आपको आईटीआर भरना होगा.

रिटर्न फाइल करने की शर्तों का दायरा बढ़ाने के पीछे सरकार का मकसद ऐसे टैक्सपेयर्स को पकड़ना है जिनकी आमदनी और खर्च में मिसमैच है. जिन लोगों की घोषित आय और खर्च आपस में मेल नहीं खाएंगे, उनका पकड़ा जाना तय है. ईमानदार करदाताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है.

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इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 139 (1) के सातवें प्रावधान के तहत अगर किसी टैक्सपेयर का बिजली का बिल साल के दौरान 1 लाख रुपये या उससे अधिक हो, अगर उसने विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये या उससे अधिक खर्च किया हो, एक या अधिक चालू खाते में एक करोड़ रुपये या उससे अधिक राशि जमा कराई हो तो टैक्स देने लायक आमदनी नहीं होने पर भी उसे आईटी रिटर्न फाइल करना होगा.

हालांकि विदेश यात्रा के मामले में छूट मिल सकती है. क्लीयरटैक्स के फाउंडर और सीईओ अर्चित गुप्ता के मुताबिक पड़ोसी देशों की यात्रा या तीर्थ स्थानों की यात्री विदेश यात्रा में शामिल नहीं है. इसलिए ऐसी यात्रा करने वालों के लिए आईटीआर फाइल करना जरूरी नहीं है. क्लीयरटैक्स इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग पोर्टल है.

एसेसमेंट ईयर 2021 के टैक्स फॉर्म्स में कई बदलाव किए गए हैं. इसके तहत टैक्सपेयर को यह declaration देना होगा कि वह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 139 (1) के सातवें प्रावधान के तहत रिटर्न फाइल करने का इच्छुक है या नहीं.

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जानकारों का कहना है कि इन शर्तों के तहत आईटीआर फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स को अपने दावों को सपोर्ट करने के लिए डॉक्यूमेंट्स संभाल कर रखने होंगे. टैक्स डिपार्टमेंट इस संबंध में सवाल पूछ सकता है. हालांकि आईटीआर फाइल करते समय किसी डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं है. लेकिन विभाग पिछले कई सालों का रेकॉर्ड चेक कर सकता है.

आय की गणना

न्यूनतम कर छूट योग्य आमदनी की गणना करते समय पूंजी लाभ पर कर छूट पर विचार नहीं किया जाएगा. पहले पूंजीगत लाभ कर पर छूट का दावा करने वाले व्यक्ति को आईटीआर फाइल करने की जरूरत नहीं होती थी, बशर्ते उनकी कुल आय कर योग्य आमदनी से अधिक न हो. लेकिन फाइनेंस एक्ट, 2019 के बाद अब सभी को छूट लाभ के बिना edge limit या मूल छूट सीमा की गणना करने की आवश्यकता है. ऐसे में अगर छूट का दावा करने से पहले आपकी आमदनी छूट सीमा से अधिक है तो आपको ITR भरना होगा. उदाहरण के लिए अगर आपकी कुल आमदनी 2 लाख रुपये है और किसी मकान को बेचने से आपको 3 लाख रुपये का पूंजीगत लाभ हुआ है जिसे छूट पाने के लिए आपने निवेश किया है. ऐसी स्थिति में आपको आईटीआर भरना पड़ेगा क्योंकि आपकी कुल आमदनी 5 लाख रुपये बैठती है. पिछले साल तक ऐसा नहीं था.

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विदेश में संपत्ति

अगर आपकी विदेश में कोई संपत्ति है तो आपको हर हाल में आईटीआर फाइल करना होगी, फिर चाहे आपकी भारत में कोई आय है या नहीं. देश के नागरिक या देश के ordinarily resident की अगर विदेश में कोई भी संपत्ति है या वह विदेश में स्थित किसी भी अकाउंट में signing authority है तो उसे अनिवार्य रूप से आईटीआर दाखिल करना होगा. विदेशी संपत्ति में किसी भी विदेशी कंपनी में फाइनेंशियल इंटेरेस्ट भी शामिल है. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उसकी आमदनी कर योग्य है या नहीं.


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