उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के तहत 12 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव प्राप्त: प्रसाद


नई दिल्ली (New Delhi). मोदी सरकार (Government) के केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि देश में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा देने की नई योजना के तहत 12 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं. उन्होंने कहा कि कोविड-19 (Covid-19) के दौरान कुछ उत्पादों के विनिर्माण (विनिर्माण लाइन) को लेकर कंपनियां चीन से भारत आई हैं. रविशंकर ने उद्योग के कार्यक्रम में कहा कि प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ा है.

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प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए जरूरतमंदों के खातों में करीब 90,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं. प्रसाद ने कहा,सभी शीर्ष मोबाइल विनिर्माता और उनके लिए ठेके पर विनिर्माण करने वाली इकाइयों ने पीएलआई योजना के तहत आवेदन किए हैं.इसमें पांच दुनिया की प्रमुख और पांच राष्ट्रीय कंपनियां हैं.कंपनियों ने आने वाले पांच साल में 12 लाख करोड़ रुपये मूल्य का मोबाइल फोन और कल-पुर्जे बनाने का वादा किया है. इसमें से 7 लाख करोड़ रुपये मूल्य के उत्पाद निर्यात किए जाएंगे.इससे 12 लाख लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा.उन्होंने कहा कि करीब 8-9 विनिर्माण सुविधाएं (खाते) चीन से भारत आई हैं.

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दरअसल मोदी सरकार (Government) ने इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक अप्रैल को तीन योजनाओं को अधिसूचित किया. ये योजनाएं इलेक्ट्रॉनिक कल-पुर्जों, सेमिकंडटर के विनिर्माण, बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के लिये संशोधित इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण संकुल (ईएमसी 2.0) योजना, और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना हैं. इन योजनाएं के जरिये संयुक्त रूप से अगले पांच साल में करीब 50,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है. पीएलआई योजना के तहत आईफोन बनाने वाली एप्पल के लिये अनुबंध पर विनिर्माण करने वाली कंपनियों (फॉक्सकान और विस्ट्रोन) के अलावा सैमसंग, माइक्रोमैक्स, लावा और डिक्सन जैसी कंपनियों ने आवेदन दिए हैं.

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