एसी कमरों में बैठकर जनहित याचिका दाखिल करने से कोई फायदा नहीं होता : सरकार


नई दिल्ली (New Delhi) . केंद्र सरकार (Government) ने मजदूरों के पलायन पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में दायर एक जनहित याचिका पर कहा है कि एसी कमरों में बैठकर जनहित याचिका दाखिल करने से कोई फायदा नहीं होता. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन याचिकाओं पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पीआईएल की दुकानों को बंद करना चाहिए.

दरअसल कोरोना (Corona virus) के चलते पूरे देश में लॉकडाउन (Lockdown) की परिस्थिति में पलायन कर रहे मजदूरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में हर्ष मंदर, प्रशांत भूषण समेत कई वकीलों ने एक जनहित याचिका दायर की थी. जिसमें कहा गया था कि शेल्टर होम्स में पर्याप्त स्वच्छता और सुविधा नहीं मिल पा रही है. अतः उन लोगों के लिए होटल (Hotel) और रिसॉर्ट्स की व्यवस्था की जाये. इस याचिका को कोर्ट ने ये कहते हुए खारिज कर दिया कि लाखों लोगों के पास लाखों विचार हैं. हम सभी के विचार नहीं सुन सकते और इसके लिए सरकार (Government) को बाध्य नहीं कर सकते.

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन याचिकाओं पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पीआईएल की दुकानों को बंद करना चाहिए. सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि जिसको असल में मदद करनी होती है, वह जमीन पर काम करता है. एसी कमरों में बैठना और जनहित याचिका दाखिल करने से कोई फायदा नहीं होता. अगर अदालत प्रवासियों और सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रवासियों के मसले पर बेहतर तरीके से काम कर रही हैं. राज्य सरकारें पहले से ही आवश्यकतानुसार भवन, स्कूल, होटल (Hotel) आदि में व्यवस्था कर रही हैं. ऐसे में अदालतों को पलायन को लेकर को नया आदेश या निर्देश देने की कोई जरूरत नहीं है.

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने मजदूरों के पलायन से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार (Government) को कमेटी बनाने का निर्देश दिया था. धर्म गुरुओं और राजनीतिक लोगों की यह कमेटी हर शेल्टर होम में जाएगी और मजदूरों से बात करेगी. इसके साथ ही मजदूरों को समझाने के लिए काउंसर नियुक्त करने का आदेश दिया गया था.

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