कोरोना के कारण 11 साल पुराने स्तर पर जा सकती हैं, पैसेंजर वाहनों की बिक्री


नई दिल्ली (New Delhi). कोरोना महामारी (Epidemic) और आर्थिक सुस्ती के कारण ऑटो इंडस्ट्री बुरे दौर से गुजर रही है.इसकारण इस वित्त वर्ष के दौरान पैसेंजर वाहनों की बिक्री 2009-10 से स्तर से नीचे जाने की आशंका है. ऑटो इंडस्ट्री का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों के दौरान सुधार के कुछ संकेत दिखने के बावजूद मांग की स्थिति बेहद कमजोर है. इसके कारण इंडस्ट्री का कैपेसिटी यूटाइलाइजेशन 50 फीसदी रहेगा. बहुत अच्छी स्थिति में यह 60 फीसदी रहेगा.

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) द्वारा सरकार (Government) के विभिन्न विभागों को दिए गए एक इंटरनल प्रजेंटेशन के मुताबिक दूसरे सेगमेंट्स में भी बिक्री में भारी कमी आने की आशंका है. सूत्रों के मुताबिक जिन विभागों को यह प्रजेंटेशन दिया गया उनमें हैवी इंडस्ट्रीज और रोड ट्रांसपोर्ट एंड परिवहन मंत्रालय शामिल है.सियाम का कहना है कि कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन (Lockdown) से एक पूरी तिमाही में बिक्री लगभग चौपट रही. इससे वित्त वर्ष के दौरान होने वाली कुल बिक्री पर प्रभाव पड़ेगा और अगर बाद में रिकवरी भी होती है,तब नुकसान की भरपाई नहीं हो सकेगी. अनुमानों के मुताबिक 2020-21 में पैसेंजर वीकल्स (कार, एसयूवी, यूवी और वैन) की बिक्री 19.1 लाख यूनिट रहेगी जबकि 2009-19 में बिक्री 19.5 लाख यूनिट रही थी. इसी तरह दोपहिया सेगमेंट (मोटरसाइकिल, स्कूटर और मोपेड) की बिक्री 1.2 करोड़ यूनिट रहने का अनुमान है जो 2011-12 के 1.34 करोड़ यूनिट के आंकड़े से कम है.

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सियाम देश में ऑटो इंडस्ट्री की सर्वोच्च संस्था है, जो मारुति सूजुकी, ह्यूंदै, टाटा मोटर्स, हीरो मोटोकॉर्प, बजाज ऑटो, टीवीएस, मर्सडीज बेंज और फोर्स इंडिया को रिप्रजेंट करती है. सियाम के डायरेक्टर जनरल राजेश मेनन ने कहा कि कमजोर धारणा और मांग पर दवाब के कारण कैपिटल एसेट्स, आरएंडडी और नई नौकरियों पर बहुत निवेश की गुंजाइश नहीं है. ऑटो इंडस्ट्री ने सरकार (Government) से टैक्स इंसेटिंव्स और डिमांड बढ़ाने के उपाय करने की मांग की है. मेनन ने कहा कि वाहनों की कीमतों को कम करने के लिए सभी कैटगरी में जीएसटी में कम से कम 10 फीसदी की कटौती होनी चाहिए.सियाम के प्रेजिडेंट राजन वढ़ेरा ने कहा कि ऑटो इंडस्ट्री बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही है. सरकार (Government) 28 से 60 फीसदी तक जीएसटी वसूलती है जबकि कंपनियों का मुनाफा 3 से 9 फीसदी के बीच है.

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