Wednesday , 16 October 2019
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छोटी आंत से मूत्राशय का पुर्ननिर्माण कर किया कैंसर का सफल इलाज


उदयपुर. गीतांजली मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल के यूरोलोजिस्ट डाॅ विश्वास बाहेती ने सिरोही निवासी रोगी हुकाराम (उम्र 55 वर्ष) के नया मूत्राशय प्रत्यारोपित कर कैंसर जैसे गंभीर रोग से निजात दिलाई. रोगी मूत्राशय में कैंसर से पीड़ित था. लगभग 10 घंटें के लम्बे आॅपरेशन में पहले मूत्राशय को बाहर निकाला गया जिसमें कैंसर मूत्राशय की मांस-पेशियों तक फैला हुआ था. और छोटी आंत के 40 सेंटीमीटर हिस्से से नया वृत्ताकार मूत्राशय बनाकर प्रत्यारोपित किया गया.

यह मूत्राशय मूल मूत्राशय के रुप एवं स्थान पर ही प्रत्यारोपित किया गया. इससे यूरेटर को जोड़ा गया जिससे मूत्र किडनी से मूत्राशय में निकल सके. इस मूत्राशय का दूसरा छोर मूत्रमार्ग से जोड़ा गया. इस सर्जरी द्वारा रोगी को कोई बाहरी बैग या उपकरणों की जरुरत नहीं होगी क्योंकि प्रत्यारोपित नया मूत्राशय मूत्र को संग्रहित एवं नियंत्रित करने में कार्यशील एवं सक्षम है. सामान्यतः मूत्राशय में कैंसर होने पर मूत्राशय को बाहर निकाल कर छोटी आंत से 10 संेटीमीटर का आइलियल कंड्यूट एवं एक तरफ यूरीन बैग लगाया जाता है. जिसे बार-बार खाली करना पड़ता है. परंतु इस प्रक्रिया द्वारा रोगी सामान्य रुप से मूत्र कर पाएगा. डाॅ बाहेती के साथ यूरोलोजिस्ट डाॅ पंकज त्रिवेदी, एनेस्थेटिस्ट डाॅ उदय प्रताप, ओटी स्टाफ पुष्कर सैनी, जयप्रकाश साल्वी एवं अविनाश आमेटा भी इस जटिल सर्जरी में शामिल थे.

डाॅ बाहेती ने बताया कि छोटी आंत से मूत्राशय बनाना और प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया काफी जटिल एवं जोखिमपूर्ण होती है. मूत्राशय के पुर्ननिर्माण के दौरान रक्तस्त्राव, खून के थक्के, संक्रमण, मूत्र का रिसाव जैसे जोखिम शामिल है. इस जटिल सर्जरी के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं अनुभव की जरुरत होती है. साथ ही आॅपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव के कारण रोगी की मृत्यु की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. विशेष प्रशिक्षण के अभाव एवं सर्जरी की जटिलता के कारण कई चिकित्सक आइलियल कंड्यूट एवं यूरीन बैग लगाते है. पर इससे रोगी की जीवन की गुणवत्ता खराब हो जाती है और रोगी का सामाजिक जीवन असंतुलित हो जाता है.

सिरोही निवासी रोगी हुकाराम बार-बार पेशाब आना, पेशाब में खून, पेशाब पर नियंत्रण न होना, पेशाब करने में परेशानी होना जैसी परेशानियों से जूझ रहा था. जिला हाॅस्पिटल में परामर्श और बायोप्सी की जांच में मूत्राशय में कैंसर का पता चलने पर रोगी गीतांजली हाॅस्पिटल आया जहां डाॅ विश्वास बाहेती द्वारा सर्जरी की गई.

डाॅ बाहेती ने बताया कि रोगी आॅपरेशन कराने की स्थिति में था इसलिए आॅपरेशन संभव हो सका. अन्यथा कीमोथेरेपी या रेडियो थेरेपी पर उसे अपना जीवन व्यतीत करना पड़ता. पर इस प्रत्यारोपण से रोगी अब बिल्कुल स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है. दुबारा कराई गई बायोप्सी की जांच में भी मूत्राशय के आस-पास के अंगों में भी कैंसर नहीं पाया गया जिससे दुबारा कैंसर होने की संभावना बहुत कम है. रोगी का इलाज राजस्थान सरकार की भामाशह स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत निःशुल्क हुआ.

Report By Udaipur Kiran

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