(नई दिल्ली) लॉकडाउन के चलते संकट में पड़ा रिटेल सेक्टर, उबरने में लग सकते हैं 9 माह

नई दिल्ली (New Delhi) . लॉकडाउन (Lockdown) और उसके बाद के आर्थिक हालात से उबरने में रिटेल सेक्टर को कम से कम 9 महीने लग सकते हैं और लॉकडाउन (Lockdown) बढ़ा तो करीब 25 फीसदी स्टोर बंद भी हो सकते हैं. हालांकि, इस सेक्टर के जानकार कोरोना (Corona virus) पर काबू होते ही रिटेल सेक्टर में तेज रिकवरी होते देख रहे हैं. उनका मानना है कि अभी जॉब कट जैसी चरम मजबूरियां पैदा नहीं हुई हैं. रिटेल सेक्टर पर कोविड-19 (Kovid-19) के असर को लेकर आयोजित एक वेबिनार में रिटेल, रियल्टी और कंज्यूमर एक्सपर्ट्स ने माना कि कोरोना संकट और उससे निपटने के उपायों के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टरों में फिजिकल रिटेल सेक्टर है.

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रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) के सीईओ कुमार राजगोपालन ने कहा अभी तय नहीं है कि 14 अप्रैल के बाद चीजें किस हद तक मुक्त होंगी, लेकिन हमारा अनुमान है कि इससे होने वाले नुकसान से उबरने में 9-10 महीने लग सकते हैं. 25 फीसदी स्टोर्स बंद हो सकते हैं और लगभग इतने को ही फंड की किल्लत से जूझना पड़ सकता है. उन्होंने बताया कि मॉडर्न रिटेल में ग्रॉसरी और एसेंशियल कमोडिटीज की हिस्सेदारी 7-8% है और इनके काम पर इस संकट का असर नहीं हुआ है. वैसे 50% रिटेलर कोरोना से पैदा होने वाले आर्थिक संकट को झेलने की क्षमता रखते हैं.

प्रॉपर्टी कंसल्टेंट ऐनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि रिटेल सेक्टर की पूरी वैल्यू चेन में प्रॉडक्टिविटी घटेगी. उन्होंने कहा कि मॉल्स को रिटेलर्स से किराया मिलने में देरी के चलते उनके लोन डिफाल्ट की नौबत भी आ सकती है. हालांकि कोई भी मॉल नहीं चाहेगा कि रिटेलर स्टोर खाली करके जाएं क्योंकि उसे भरने के लिए दूसरा कोई नहीं आने वाला. ऐसे में मॉल्स के पास एक विकल्प होगा कि रिटेलर्स को फौरी राहत देते हुए रेंटल कुछ समय के लिए टाल दें. यहां आरबीआई (Reserve Bank of India) और सरकार, दोनों के दखल से चीजें और आसान हो सकती हैं.
अर्न्स्ट एंड यंग के हेड (कंज्यूमर प्रॉडक्ट एंड रिटेल) पिनाकी रंजन मिश्रा ने कहा कि रिटेल सेक्टर में मौजूदा संकट के बावजूद तुरंत जॉब कट के आसार नहीं दिख रहे हैं और रिटेलर्स को भी इसे आखिरी विकल्प के तौर पर अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि चूंकि यह संकट अपने आप में अलग है, जिससे बिजनेस पर सिर्फ विराम लगा है न कि डिमांड घटी है, लिहाजा ऐसे में रिकवरी भी तेज होगी. उन्होंने कहा कि वजूद बचाए रखने के उपाय के तौर पर शुरुआत सैलरी कट से हो सकती है. कटौती की मात्रा बड़े पदों से छोटे की ओर घटते क्रम में होनी चाहिए. एक्सपर्ट्स ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को फिस्कल डेफिसिट की चिंता नहीं करते हुए आर्थिक मदद के तौर पर जीडीपी का 2-3% खर्च करना चाहिए.

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