Wednesday , 16 October 2019
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प्रदेश में बाढ़ प्रभावितों को तत्परता से राहत

बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य जारी, केन्द्र सरकार तत्काल रिलीज करे 30 हजार करोड़ : शर्मा

भोपाल . जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने प्रदेश में अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति के संदर्भ में कहा है कि राज्य सरकार राहत एवं बचाव कार्यों पर अब तक 325 करोड़ रूपये व्यय कर चुकी है. राहत और बचाव कार्य के साथ ही प्रभावितों को राहत कार्य निरंतर जारी है.

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उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रशासनिक अमले और आपदा प्रबंधन एजेन्सियों ने अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिये पूरी मुस्तैदी से काम किया है और कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि गाँधी सागर बाँध से भी न्यूनतम समय में संबंधित शासकीय अमले और एजेन्सियों ने बाँध से पानी निकालने का काम किया.

बाढ़ की स्थिति पर राजनीति नहीं

जनसम्पर्क मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश प्रदेश में अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति पर किसी तरह की राजनीति नहीं कर रहा है. प्रदेश सरकार का पूरा ध्यान प्रदेश के बाढ़ प्रभावितों की सुरक्षा और उन्हें राहत देने पर केन्द्रित है. श्री शर्मा ने सरदार सरोवर को 15 अक्टूबर के निर्धारित समय के काफी पहले ही सरदार सरोवर को उच्चतम जल संग्रहण क्षमता तक भरने के गुजरात सरकार के कृत्य को मध्यप्रदेश की जनता के साथ ज्यादती बताया.

जनसम्पर्क मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार केन्द्र सरकार से अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति से हुए नुकसान और प्रभावितों को राहत पहुँचाने के लिये अधिकतम सहायता का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रदेश से निर्वाचित केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहे हैं, जबकि उन्हें प्रधानमंत्री को अधिकतम सहायता देने के लिये पत्र लिखना चाहिए.

शर्मा ने माँग की है कि प्रदेश में अति वर्षा और बाढ़ से हुई जन, पशु, फसल और भौतिक अधोसंरचनाओं को भारी पैमाने पर हुई क्षति पर 11 हजार 881 करोड़ की सहायता तत्काल मुहैया कराना चाहिए. श्री शर्मा ने कहा कि इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार द्वारा रोके गये 10 हजार करोड़ और गुजरात से बकाया 10 हजार करोड़ रूपये भी केन्द्र सरकार जारी करे.

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जनसम्पर्क मंत्री श्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कमल नाथ द्वारा प्रदेश के उच्च स्तरीय प्रशासनिक अमले के साथ निरंतर अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति की राउंड द क्लॉक मॉनीटरिंग की गई और की जा रही है. मुख्यमंत्री के कुशल और कल्पनाशील मार्गदर्शन में अति वर्षा और बाढ़ प्रभावित लगभग 50 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया.

अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति : एक नजर में

मध्यप्रदेश में एक जून 2019 से 17 सितंबर 2019 की अवधि में प्रदेश में 1192.2 मिलीमीटर वर्षा हो चुकी है. यह एल.पी.ए ( दीर्घकालीन वार्षिक वर्षा) के इस अवधि के औसत से 33 प्रतिशत अधिक है. प्रदेश के 13 जिलों में (सभी पश्चिमी और मध्य क्षेत्र) एल.पी.ए. से 60 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है. कुल 3 जिलों मंदसौर, आगर, नीमच में उनके एल.पी.ए. से दोगुनी वर्षा दर्ज की गई है.

प्रदेश के राजगढ़, रायसेन, विदिशा, खण्डवा, रतलाम, हरदा, मंडला, बालाघाट, सिवनी, सागर, मंदसौर, उज्जैन, आगर, नीमच, भोपाल, शाजापुर, नरसिंहपुर, देवास, मुरैना, श्योपुर, भिण्ड, निवाड़ी, सीहोर और अशोकनगर में अतिवर्षा से गंभीर स्थिति पैदा हुई है. इन जिलों में अति वर्षा से विभिन्न बांधों/जलाशयों से पानी की निकासी अथवा नदियों के बैकवाटर से ज्यादा पानी के प्रवाह से स्थिति गंभीर हुई है. अकेले मंदसौर जिले में गांधी सागर बांध में 16 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह हुआ, जबकि बांध का अधिकतम जल निकासी स्तर (आउट फ्लो) 6.6 लाख क्यूसेक पानी है. इस स्थिति के उत्पन्न होने से बांध के सभी 19 गेट खोले गये हैं. इसके अलावा इंदौर संभाग के बड़वानी, धार और अलीराजपुर जिले सरदार सरोवर परियोजना के अप्रत्याशित बढ़े हुए जल-स्तर से प्रभावित हुए हैं.

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प्रदेश के 28 बड़े बांधों में से 17 बांध के गेट वर्तमान में खुले हुए हैं. प्रदेश के अधिकांश जलाशय अपनी जल संग्रहण क्षमता से सौ फीसदी जल के साथ पूर्ण जलाशय स्तर (एफआरएल) पर है. प्रदेश की अधिकांश नदियाँ पिछले दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और अभी भी खतरे के निशान से ऊपर ही बह रही है. प्रदेश में आने वाले समय में अब अधिक वर्षा की स्थिति नहीं बन रही है.

प्रदेश के कुल 52 जिलों में से 36 अति वर्षा से प्रभावित हुए हैं. तहसील स्तर पर देखा जाये तो प्रदेश की 385 ग्रामीण तहसीलों में से 186 ग्रामीण तहसील अति वर्षा से प्रभावित हुई है. इसी तरह प्रदेश के 52 हजार गाँवों में से लगभग 8000 गाँव अति वर्षा से प्रभावित हुए हैं.

प्रदेश में अति वृष्टि एवं बाढ़ से हुई क्षति का अवलोकन करने के लिये केन्द्रीय अंतर मंत्रालयीन दल दो दिवसीय दौरे पर कल 19 सितम्बर को भोपाल आएगा. दल का प्रदेश प्रवास 19 एवं 20 सितम्बर तक रहेगा. दल दो हिस्सों में प्रदेश के अतिवृष्टि और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगा. प्रथम दल दौरे के प्रथम दिन 19 सितंबर को विदिशा एवं रायसेन के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगा. दूसरे दिन यह दल राजगढ़ जिले में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के भ्रमण के बाद भोपाल लौटेगा.

इसी प्रकार दूसरा अध्ययन दल 19 सितम्बर को स्टेट हैंगर से हेलीकॉप्टर द्वारा सीधे मंदसौर के लिये रवाना होगा. मंदसौर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के भ्रमण के बाद दूसरे दिन यह दल आगर-मालवा जिले में स्थिति का आकलन करेगा. यह दल आगर-मालवा से दोपहर बाद भोपाल के लिये रवाना होगा.

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प्रदेश में वर्तमान में 109 राहत शिविर संचालित किये जा रहे हैं. इन शिविरों में एक दिन से लेकर 7 दिन की अवधि के लिये 28 हजार 445 लोगों को रखा गया. वर्तमान में इनमें से 66 राहत शिविर सिर्फ 5 जिलों, नीमच, मंदसौर, भिण्ड, राजगढ़ और मुरैना जिलों में संचालित है. आज दिनांक की स्थिति में राहत शिविरों में 18 हजार 470 लोग रह रहे हैं. प्रदेश में अति वर्षा और बाढ़ से प्रभावित 242 गाँवों को पूर्णत: या आंशिक तौर पर खाली कराया गया है. कुल 530 जनहानि हुई है. इनमें से 225 जनहानि बाढ़ और बिजली गिरने से होना दर्ज हुआ है. इसी तरह 901 बड़े और 531 छोटे पशुओं को मिलाकर अब तक कुल 1432 पशुहानि दर्ज की गई है.

फसलों और भौतिक अधोसंरचना को हानि

प्रदेश में अति वर्षा और बाढ़ से आज की स्थिति में फसलों को 24 लाख हेक्टेयर में 9600 करोड़ रूपये की क्षति दर्ज की गई है. कुल 22 लाख किसान प्रभावित हुए हैं. प्रभावित किसानों में 13.90 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र के 15 लाख 96 हजार लघु और सीमांत श्रेणी के किसान है.

अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति से शहरी क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कें बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हुई है. क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत पर 1566 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है. कुल 54 हजार 700 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं. इनमें पूर्णत: और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे और पक्के, दोनों तरह के मकान है. क्षतिग्रस्त मकानों को हुई क्षति का मूल्य 540 करोड़ रूपये आँका गया है. इसके अलावा आँगनवाड़ी, छात्रावास, हॉस्पिटल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, हेंडपंप, पंचायत भवन, शहरी सड़कें और ऊर्जा और सिंचाई अधोसंरचनाएँ जैसी शासकीय अधोसंरचनाओं को भी क्षति हुई है. इस क्षति का आँकड़ा 155 करोड़ रूपये आंकलित किया गया है.


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