भारत का मानना है कि म्यांमार में कानून का शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल किया जाएं

जेनेवा . भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में कहा कि म्यांमार में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करना सभी हितधारकों की प्राथमिकता होनी चाहिए और हिरासत में लिए नेताओं को रिहा किया जाना चाहिए. साथ में उसने दक्षिण पूर्व एशियाई देश के नेतृत्व से शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से अपने मतभेदों को हल करने के लिए मिलजुलकर काम करने का आह्वान किया. भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने म्यांमार की स्थिति पर अनौपचारिक बैठक में शुक्रवार (Friday) को उक्त टिप्पणी की. उन्होंने कहा, भारत म्यांमार के साथ जमीन और समुद्री सीमा साझा करता है, उसका शांति और स्थिरता बनाए रखने में सीधा हित है.इसकारण म्यांमार के हालिया घटनाक्रम पर भारत करीब से निगाह रख रहा है. हम इसकी चिंतित हैं कि लोकतंत्र की दिशा में म्यांमार में पिछले दशकों में हासिल की गई बढ़त को कमतर नहीं किया जाना चाहिए. तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत का मानना है कि कानून का शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बरकरार रखा जाना चाहिए, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहाकर शांति कायम रहनी चाहिए.

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उन्होंने कहा कि हम म्यांमार के नेतृत्व से आह्वान करते हैं, कि वे अपने मतभेदों को शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से सुलझाने के लिए मिलकर काम करें. एक फरवरी को सेना ने म्यांमार की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी.साथ स्टेट काउंसलर आंग सांग सू ची, राष्ट्रपति यू विन मिन्त और अन्य शीर्ष राजनीतिक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था. तिरुमूर्ति ने कहा, लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करना म्यांमा में सभी हितधारकों की प्राथमिकता होनी चाहिए.

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उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को महत्वपूर्ण मोड़ पर म्यांमार के लोगों को अपना रचनात्मक समर्थन देना चाहिए. इस बीच संयुक्त राष्ट्र में म्यांमार के राजदूत ने देश की सेना की अवहेलना कर संयुक्त राष्ट्र महासभा से सैन्य तख्तापलट को खत्म करने में मदद के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की गुहार लगाई. के एम तुन बेदखल हुई असैन्य सरकार के प्रति वफादार रहे. उन्होंने कहा कि वह एनएलडी नीत असैन्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. तुन ने तख्तापलट की निंदा की और सभी सदस्य राष्ट्रों और संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वे सैन्य तख्तापलट की निंदा करें और सैन्य शासन को किसी भी माध्यम से मान्यता न दें.

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