महामारी…इंद्रदेव और किसान…!

उमरिया. एक तरफ देश मे फैल रही इस भीषण महामारी से लड़ने देश वासी घर पर रहकर कोरोना से लड़ रहा है वही दूसरी तरफ इंद्रदेव लगातार बारिश कर किसानो की छाती पर गहरा प्रहार कर रहे है. जिससे किसान लाचार और बेबश हो गया है. हर 15 दिन मे एक बार जोरदार बारिश का होना साथ मे ओलों का गिरना कहीं न कहीं किसानों की मेहनत पर पानी फेरने का काम हो रहा है. वही कुछ लोगो का मानना है कि इस बिगड़े मौसम के कारण कोरोना का दुष्प्रभाव और बढ़ रहा है. माना जा रहा है कि जिसे भगवान का दर्जा दिया गया है वह भी कोरोना नामक बिभीषिका का साथ दे रहे है.

किसानों की हर फसल तबाह
लगातार बारिश होने के कारण क्षेत्र के किसानों की तिलहन, दलहन व गेहूं की फसल धीरे धीरे कर नष्ट होने की कगार पर है. पहले तिलहन फिर दलहन और अब गेहूं की फसल चौपट होने की तैयारी मे है. बेमौसम बारिश ने जहां किसानों को भुखमरी की आखिरी सीमा तक ला खड़ा किया है, साथ ही पूर्व मे ओलों से प्रभावित हुई फसलों का आंकलन भी क्षेत्र मे नही हो पाया है.

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हल्का पटवारियों ने भी कहर ढाया
अपनी जमीन पर दिन रात पसीना बहाकर उससे अनाज पैदा कर लोगो का पेट भरने वाला अन्यदाता आज खुद अपने परिवार का पेट नही भर पा रहा है. बिगत दिवस आई प्राकृतिक आपदा ने किसानों की कमर तोड़ दी, जिसमे की जमा पूंजी भी किसानी लागत के रुप मे लगी और अंतिम पड़ाव पर वह खत्म हो गई. इस विपदा पर किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने राज्य सरकार (Government) (State government) ने जिला प्रशासन को आदेशित किया कि वह हल्का पटवारियों से ओला बारिश से खराब हुई फसलों का मुआयना करे़ जिससे उन्हें राहत दी जा सके, लेकिन ऐसा नही हुआ. जिला प्रशासन ने आदेश दे दिया मगर दोबारा यह पूछने की जहमत नही उठाई की पटवारियों ने अब तक कितने रिकार्ड संधारित किये. कहने का मतलब साफ है कि ओला और बारिश से खराब हुई फसलों का मुआयना आज भी लालपुर, घंघरी, विलाईकाप, नौगवां टोला जैसे अनेकों ग्रामों मे नही हुआ. पटवारी ब्रजलाल विश्वकर्मा बताते है कि सब जगह सर्वे हो गया जबकि किसान कहते है कि पटवारी ने खेतों मे झांका तक नही. इसका मतलब साफ है कि मनमानी और घर पर बैठकर हुए सर्वे मे आपनों को उपकृत जमकर किया जायेगा जो खेती और खेत का क,ख, और ग भी नही जानते.
जिला प्रशासन भी जिम्मेदार
आज जिस प्रकार से इस महामारी से निपटने उपाय और अनुसंधान किये जा रहे है उसी प्रकार से देश का हर नागरिक इसमे अपनी सहभागिता निभा रहा है. लेकिन जिले मे लाकडाउन का पालन किस तरीके से किया जा रहा है वह किसी से छुपा नही है. प्रशासन मे बैठे मुखिया ही इससे बेपरवाह है, जिन्होंनें ने एक दिन भी न तो लोगो को जागरुक करने प्रयास किया और न ही इस कार्य मे लगे पुलिस (Police), स्वास्थ्य महकमा व सफाई कर्मियों सहित सामाज सेवियो का मनोवल बढ़ाया. हां जागरुक अगर लोग हुए है तो वे पीआरओ की पुरानी और कापी पेस्ट खबर को सोसल मीडिया (Media) मे पढ़कर. बहरहाल जिले मे जिस तरह से किसानो को नुकसान पहुंचा है, उसका सही आंकलन होना ही अच्छे प्रशासक की निशानी है और इस महामारी कोरोना से लड़ने प्रशासन को आगे आकर व्यवस्थाएं दुरुस्त करनी चाहिए. जिससे लोगो को असुविधा न हो.

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