महाराणा सज्जन सिंह कालीन (1874-1884) मेवाड़ राज्य में शिक्षा प्रबंध


उदयपुर (Udaipur).महाराणा सज्जन सिंह जी की 161वीं जयंती पर दी जाने वाली जानकारियों में आज की ऐतिहासिक कड़ी में महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन द्वारा संचालित महाराणा मेवाड़ अनुसंधान केन्द्र, उदयपुर (Udaipur) द्वारा मेवाड़ राज्य में शिक्षा प्रबंध पर संक्षिप्त प्रकाश डाला जा रहा हैं. पाठकों की जानकारी के लिए इसे इटर्नल मेवाड़ की पोस्ट पर भी दिया जा रहा है:-

महाराणा सज्जन सिंह जी मेवाड़ में स्कूली शिक्षा को बहुत बढ़ावा दिया. महाराणा सज्जन सिंह जी अपने पिता महाराणा शम्भु सिंह जी और स्वामी दयानंद सरस्वती जी से प्रेरित होकर अपने राज्य मेवाड़ में 9 राजकीय स्कूल आरम्भ करवाये. उनमें से चार स्कूल उदयपुर (Udaipur) नगर में आरम्भ करवाये, उदयपुर (Udaipur) के बाद ऋषभदेव, जावर, जहाजपुर, सादड़ी और कोटड़ा में भी स्कूली शिक्षा को बढ़ाते हुए स्कूल आरम्भ करवाये. उदयपुर (Udaipur) में स्कूली शिक्षा एवं स्कूलों की देखरेख के लिए मिस्टर बेयर्ड को सुपरिटेंडेंट के पद पर नियुक्त किया. संस्कृत के लिए विनायक जी शास्त्री, हिन्दी एवं संस्कृत के लिए पंडित खेमराज जी तथा उर्दू व फारसी के लिए मौलवी अब्दुल रहमान जी को शिक्षण कार्य के लिए नियुक्त किये गये.

  अस्पताल में भर्ती के लिए पॉजिटिव रिपोर्ट जरूरी नहीं

राज्य में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महाराणा ने सन् 1876 में श्रीमती लोनारगन को गर्ल्स स्कूल की हेडमिस्ट्रेस नियुक्त कर उनके साथ दो अन्य शिक्षिकाओं को भी नियुक्ति किया. राज्य के सभी स्कूलों को प्रतिवर्ष अनुदान प्रदान किया जाता रहा. महाराणा अनुदान की प्रतिवर्ष वृद्धि कर प्रदान करते थे. सन् 1877 में स्कूलों के कुशल प्रबंधन के लिए एक शिक्षा समिति का गठन किया और महाराणा एवं पोलिटिकल एजेंट उस समिति के अध्यक्ष रहे. महाराणा ने भू-राजस्व में उपकर लगाकर स्कूली शिक्षा के लिए अलग से प्रबन्ध किया. यही नहीं महाराणा के स्वर्गवास (23 दिसम्बर 1884) पर सज्जन स्कूल और सज्जन अस्पताल की स्थापना के लिए 2 लाख रुपये दान दिये गये.

न्‍यूज अच्‍छी लगी हो तो कृपया शेयर जरूर करें