लखनऊ विवि के एलएलबी थर्ड सेमेस्टर एग्जाम का पेपर हुआ था लीक


एसटीएफ ने अपनी जांच रिपोर्ट में किया था खुलासा

लखनऊ (Lucknow). यूपी की राजधानी लखनऊ (Lucknow) स्थित लखनऊ (Lucknow) विश्वविद्यालय की दिसंबर, 2019 में हुई एलएलबी थर्ड सेमेस्टर परीक्षा में पर्जा लीक हुआ था. मामले की जांच कर रही एसटीएफ ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह खुलासा किया है. मालूम हो विश्वविद्यालय प्रशासन शुरुआत से ही पेपर लीक होने की बात से मुकर रहा था. एसटीएफ ने पेपर लीक के खुलासे के साथ ही विश्वविद्यालय के चार प्रोफेसरों को दोषी भी पाया है. पेपर आउट होने के संबंध में 10 दिसम्बर 2019 को वाट्स ऐप पर ऑडियो वायरल होने के बाद विवि प्रशासन ने तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा रद्द कर दी थी. वहीं, पूर्व वीसी एस के शुक्ल ने मामले में शामिल दो प्रोफेसरों को निलंबित करते हुए परीक्षा रद्द कर दी थी. साथ ही एसटीएफ जांच की सिफारिश भी की थी.

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एसटीएफ जांच रिपोर्ट के मुताबिक थर्ड सेमेस्टर का पेपर 50 फीसदी तक लीक हुआ था. परीक्षा के समय मोबाइल पर नोट कराए गए सवालों में से पेपर में 50 फीसदी सवाल हुबहू मिले हैं. रिपोर्ट से साफ है कि डीन लॉ फैकल्टी प्रो सीपी सिंह, पूर्व डीन आरके सिंह, डॉ अशोक कुमार सोनकर और डॉ. सतीश चंद्र से ऋचा मिश्रा ने पेपर से संबंधित जानकारी प्राप्त की थी. चारों प्रोफेसरों ने ऋचा मिश्रा को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की.

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ऋचा के ऑडियो सुनकर यह जाहिर हो रहा था कि उसकी लविवि के शिक्षकों से नियमित रूप से बातचीत होती रहती थी. यहां तक कि ऋचा को यह भी पता है कि किस विषय का पेपर कौन बना रहा है? इसलिए वह बिना संकोच के सीधे उसी शिक्षक को फोन कर परीक्षा में आने वाले सवाल भी पूछ लेती थी. वायरल एक अन्य ऑडियो में वह कहती पाई गई है कि कुलपति अपने घर के हैं. इसलिए कोई चिंता नहीं. यह बात उसने एक अन्य ऑडियो में भी दोहराई. अगर फेल हो गई तो बड़ी बदनामी होगी. जिसे पूर्व कुलपति शैलेश शुक्ला ने नकार दिया था. हालांकि शैलेश शुक्ला को अब एसटीएफ से क्लीन चिट मिल गई है.

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परीक्षा नियंत्रक की तरफ से डॉ. अशोक, डॉ. ऋचा व अन्य के खिलाफ हसनगंज कोतवाली में सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया गया है. जिसकी जांच अभी भी प्रचलित है. पढ़ाई के मामले में लविवि भले ही मेधावियों की पहली पसंद न रह गया हो, लेकिन रसूखदारों को डिग्री दिलाने में अभी भी इसका जवाब नहीं है. पिछले 10 साल में लविवि से कई प्रशासनिक अधिकारी लॉ की डिग्री ले चुके हैं. सूत्रों की मानें तो इनमें से कई ने पढ़ाई के लिए छुट्टी तक नहीं ली है. नियमित नौकरी के साथ उन्होंने विवि के शिक्षकों की मेहरबानी से नियमित डिग्री मिली है.

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