Friday , 25 May 2018
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लव-कुश जन्म स्थली और महर्षि विश्वामित्र आश्रम और झरनों की प्राकृतिक सुंदरता के बीच सीता माता मंदिर पर पांच दिवसीय मेला शुरू

लव-कुश जन्म स्थली और महर्षि विश्वामित्र आश्रम और झरनों की प्राकृतिक सुंदरता के बीच सीता माता मंदिर पर पांच दिवसीय मेला शुरू

  प्रतापगढ़। सीता माता वन्यजीव अभयारण्य में शुक्रवार को एकादशी के मौके पर सीता माता मेले का शुभारंभ हुआ। भीषण गर्मी के दौर में भी श्रद्धालुओं की आस्था में कमी नजर नहीं आई। पहले दिन से ही यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सीता माता वन्यजीव अभयारण्य विश्व में उड़न गिलहरी के लिए अपनी अलग ही पहचान रखता है। इसकी पहचान का एक और भी कारण है। इसका रामायण काल से जुड़ा होना। मान्यताओं के अनुसार वनवास से लौटने के बाद जब भगवान राम ने माता सीता को वनवास दिया था, तब उन्होंने यहीं महर्षि विश्वामित्र के आश्रम में अपना वनवास का समय व्यतीत किया। सीता माता अभयारण्य में माता जानकी का एक मंदिर भी है और इस मंदिर में साल में एक बार लगने वाले मेले के दौरान ही श्रद्धालुओं को माता सीता के दर्शन होते हैं।

मान्यता के अनुसार सीता माता वन्य जीव अभयारण्य का सीधा संबंध रामायण से है। लोगों का मानना है कि जब रावण वध के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने पर लोगों के सवाल पर माता सीता को वनवास दिया गया था। तब माता सीता ने अपना वनवास इसी अभयारण्य में ही काटा। इसके उदाहरण के तौर पर यहां सीता माता मंदिर के साथ लव-कुश जन्मभूमि, महर्षि विश्वामित्र का आश्रम और ठंडे, गर्म पानी के कुंड भी हैं। जहां आज भी एक कुंड में ठंडा पानी और दूसरे में गर्म पानी आता है। इसके अलावा मंदिर दर्शन को जाते समय प्रकृति की अद्भुत सुंदरता यहां देखने को मिलती है। हरियाली से ढंकी पहाड़ियां और कई प्राकृतिक झरने यहां लोगों को देखने को मिलते हैं।

सीतामाता के मंदिर के अलावा यहां पिकनिक के लिए भी लोग आते हैं। इस जंगल में वन विभाग की परमिशन के बाद जा सकते हैं। चारों तरफ फैली हरियाली और पानी के झरने लोगों का आनंद का अनुभव करवाते हैं। सीता माता मंदिर तक करीब 5 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करना पड़ता है। इस रास्ते में गर्मी के समय में भी थकावट नहीं होती। इसका मुख्य कारण इस रास्ते से वनस्पति की हरियाली, खूबसूरत पहाड़ और पानी के छोटे छोटे स्थान यहां के मौसम को ठंडा बनाए रखते हैं। नदी झरनों और खूबसूरती के बीच बसे सीतामाता अभयारण्य में मोबाइल नेटवर्क भी नहीं आता है और ना यहां कोई वाहन जा सकते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया से दूर इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में कुछ पल सुकून के बिताने के लिए इससे बेहतर कोई स्थान नहीं हो सकता।

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