संदेह के घेरे में डोडा चूरा जलाने की प्रक्रिया

चित्तौडग़ढ़. वर्ष 2017-18 के तहत अफीम की फसल का तौल होने के बाद राज्य सरकार (State government) के निर्देशन में डोडा चूरा जलाने की प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ रही है. जिस प्रकार आबकारी महकमा डोडा चूरा जला रहा है, इससे डोडा चूरा तस्करों के हाथ लगने की आशंका बढ़ रही है. वहीं मिली भगत कर डोडा चूरा के स्थान पर खांकला, मूंगफली के छिलके आदि जलाने की आशंका जताई जा रही है.

केन्द्र सरकार की ओर से अफीम बुवाई को लेकर सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. वहीं जिन किसानों ने चीरे लगा कर अफीम का उत्पादन लिया उनके डोडे अब भी घर पर रखे हुए हैं, जिन्हें नष्ट करना राज्य सरकार (State government) के जिम्मे हैं. राज्य सरकार (State government) द्वारा डोडा चूरा पर रोक लगाये जाने के बाद इसे नष्ट करने के लिए आदेश दिए गए है. इसमें आबकारी, पुलिस (Police), नारकोटिक्स, प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में डोडा चूरा नष्ट किया जाना सुनिश्चित किया गया है. लेकिन अब ये प्रक्रिया सवालों के घेरे में है. डोडा चूरा नष्ट किए जाने को लेकर जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है. सूत्रों का कहना है कि जिन स्थानों पर डोडा चूरा नष्ट किया जा रहा है वहां डोडा चूरा के स्थान पर कचरा, गेहूं का खांखला इत्यादि जलाया जा रहा है और डोडा चूरा बचाया जा रहा है जो भविष्य में तस्करी कर ऊंचे दामों पर बेचा जाएगा. इसके लिए पट्टेधारियों से इस ऐवज में मोटी राशि वसूल की जा रही है. इस पूरी प्रक्रिया में कई ऐसे सवाल है जो इस पूरी की पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना रहे है.

ना समय तय और ना दिनांक

डोडा चूरा नष्ट करने के लिए तिथियों की घोषणा कर दी गई है जिसके अनुसार विभिन्न क्षेत्रो में डोडाचूरा नष्ट किया जाना है. इन क्षेत्रो में तय की गई तिथियों में उपखण्डवार तिथिया दी गई है, लेकिन किस स्थान पर कब डोडाचूरा जलाया जाएगा इसको लेकर कोई समय अवधि निश्चित नही है. विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार डोडाचूरा नष्ट करने के लिए चित्तौडग़ढ़ वृत्त की गंगरार और चित्तौडग़ढ़ तहसील के लिए 11 जून से 12 जून और चित्तौडग़ढ़ तहसील के लिए 21 मई से 27 मई, कपासन वृत की तहसीलों के लिए 21 से 31 मई, डूंगला वृत के लिए 23 मई से 3 जून, निम्बाहेड़ा वृत के लिए 30 मई से 8 जून, बेगूं वृत के लिए 21 से 29 मई तक की तिथियां जारी की गई है और समाचार पत्रों में सम्बन्धित अधिकारियों के मोबाईल नम्बर जारी किए गए है, लेकिन मजेदार बात यह है कि कोई भी अधिकारी इस बात की जानकारी नही देता है कि किस दिनांक को कितनी बजे डोडाचूरा का निस्तारण किस स्थान पर किया जाएगा. जानकारी मांगने पर अधिकारियों द्वारा अन्य अधिकारियों का नम्बर देकर पल्ला झाड़ा जा रहा है.

रात के अंधेरों में जल रहा डोडाचूरा

डोडाचूरा नष्ट करने को लेकर सूत्रों का कहना है कि जब यह प्रक्रिया अपनाई जाती है तो अधिकांश समय रात का होता है जो सामान्यत: मध्य रात्रि से लेकर अलसुबह तक का होता है. दिन के समय में ये प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती. जिन क्षेत्रों में डोडाचूरा जलाया जा रहा है उन क्षेत्रों में डोडाचूरा जलाने से पूर्व सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है. लम्बरदारों, मुखियाओं से दस्तावेजों की आड़ में राशि वसूल कर एकत्र की जाती है. जानकारों का कहना है कि एक पट्टे पर औसत तीन से साढे तीन किलोग्राम डोडाचूरा प्रति आरी होता है. इस हिसाब से प्रति पट्टे पर 30 से 35 किलो डोडा चूरा एकत्र होता है, लेकिन डोडाचूरा जलाने के लिए लाये जाने पर कोई तोल नही किया जाता है ना ही इस बार कोई वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी नही करवाई जा रही है.

जिम्मेदार सब फिर भी दोषी किसान

इस मामले में चार विभागों की जिम्मेदारियां तय की गई है जिससे कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे और डोडाचूरा की तस्करी पर लगाम लग सके, लेकिन विगत वर्ष में बड़ी संख्या में जिले में डोडाचूरा तस्करी के मामले सामने आए थे. इस पूरी प्रक्रिया में यदि डोडाचूरा नष्ट करने के बावजूद भी डोडाचूरा बरामद हो जाता है तो केवल किसान ही दोषी पाया जाता है जबकि डोडाचूरा नष्ट करने के दस्तावेजो पर सभी अधिकारियों के हस्ताक्षर होते है.

चित्तौडग़ढ़ जिला आबकारी अधिकारी भारतभूषण सिंह ने बताया कि पूरी पारदर्शी प्रक्रिया से डोडा चूरा का निस्तारण हो इसके लिए पूरी प्रक्रिया अपनाई जाती है. डोडा चूरा की मात्रा को लेकर किसान द्वारा फार्म सी भरा जाता है. साथ ही वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी को लेकर विभाग के निर्देश नहीं है. चार अलग-अलग विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में डोडा चूरा जलाया जाता है. इसलिए उनकी उपस्थिति के अनुसार समय तय किया जाता है.

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