हरसिमरत के इस्तीफे के बाद राजनीति और गरमाई

चंडीगढ़ . संसद में प्रस्तावित कृषि विधेयकों को लेकर पंजाब में जो विरोध हो रहा था, वह केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे के बाद और भी गरमा गया है. बीजेपी की मुख्य सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने केंद्र में सत्तारूढ़ NDA का साथ छोड़ने तक के संकेत दे दिए हैं.

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कांग्रेस नेता और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हरसिमरत के इस्तीफे को महज नौटंकी करार दिया है. आम आदमी पार्टी ने तो कांग्रेस और अकाली दल दोनों को इस बिल के लिए जिम्मेदार ठहराया है. डेढ़ साल बाद राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भी सभी दल समीकरण साधने में जुट गए हैं.

दरअसल, 2022 में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाला है. कृषि बिल को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को राज्य के आगामी चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. इस समय सत्तारूढ़ कांग्रेस भी 2017 में किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से लेकर ही कुर्सी तक पहुंची थी. इसके साथ ही शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी भी पंजाब के मुख्य वोट बैंक माने जाने वाले किसानों के मुद्दे को यूं ही नहीं जाने देना चाहती हैं.

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कांग्रेस ने पंजाब में अकाली दल को NDA के सहयोगी होने की वजह से ‘किसान विरोधी’ होने के साथ ही सत्ता की लालची पार्टी के तौर पर स्थापित करने की कोशिश की है. वहीं किसानों के उग्र तेवर देखते हुए अकाली दल के लिए भी इस मुद्दे पर स्टैंड अलग रख पाना मुश्किल होता जा रहा था. वहीं आम आदमी पार्टी ने कृषि बिल के लिए कांग्रेस और अकाली दल दोनों को जिम्मेदार ठहराया है.

तीन कृषि बिल को लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में किसान सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. पंजाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के अलावा भारतीय किसान यूनियन ने भी इन बिलों का सख्त विरोध किया है. किसान मजदूर संघर्ष समिति ने तो पंजाब में ट्रेन रोको अभियान की चेतावनी तक दे डाली है.

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प्रदर्शन कर रहे किसानों ने यह भी चेतावनी दी कि संसद में अगर राज्य का कोई सांसद इस विधेयक का समर्थन करेगा तो उसे गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा. अब केंद्र में एनडीए सरकार की सहयोगी अकाली दल ने भी मोर्चा खोल दिया है.

अकाली दल चीफ सुखबीर सिंह बादल ने लोकसभा में किसान विधेयक का जबर्दस्त विरोध किया. उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से लाए जा रहे कृषि क्षेत्र के तीन विधेयक पंजाब में खेती को बर्बाद कर देंगे. उन्होंने लोकसभा में ही स्पष्ट तौर पर ऐलान कर दिया कि विधेयक के विरोध में उनकी पत्नी और पार्टी की तरफ से सरकार में शामिल हरसिमरत कौर बादल मंत्री पद छोड़ देंगी.

इसके बाद हरसिमरत कौर बादल ने अपना इस्तीफा सौंपकर कहा, ‘मैं ऐसी सरकार का हिस्सा नहीं रहना चाहती जो किसानों की चिंताएं दूर किए बिना कृषि क्षेत्र के लिए विधेयक लाए. भटिंडा से लोकसभा सांसद हरसिमरत को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय मिला हुआ था. सुखबीर ने किसान हितों के लिए कोई भी कुर्बानी देने की बात कहते हुए यह तक कहा कि एनडीए का हिस्सा बने रहना है या अब अलग हुआ जाए, बाद में इसका फैसला भी करेंगे.

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पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे पर कहा कि यह ‘और कुछ नहीं बल्कि एक नौटंकी’ है. अमरिंदर ने कहा कि हरसिमरत के इस्तीफे का फैसला किसानों की चिंता से नहीं बल्कि बादल परिवार के राजनीतिक करियर को बचाने की चिंता से प्रेरित है. अगर अकाली दल ने पहले कड़ा रुख अपनाया होता तो केंद्र संसद में ‘किसान विरोधी’ विधेयक आगे बढ़ाने से पहले 10 बाद सोचता.

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पहले ही इन कृषि विधेयकों को राष्ट्रहित के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे पंजाब में ‘अशांति और असंतोष’ फैल सकता है. सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र के कृषि संबंधी विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन करने पर किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए मामले वापस लिए जाएंगे. लेकिन उन्होंने उनसे अब सड़कें जाम नहीं करने की अपील की.


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