Sunday , 16 June 2019
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एक माह में बुखार से तीन जवान मौत के बाद सहमा भोईखेड़ा

हर घर में बीमार, ध्यान नहीं दे रहा चिकित्सा विभाग, – गांव में बढ़ रहे बुखार के रोगी

चित्तौडग़ढ़, 12 अक्टूबर (उदयपुर किरण). मौसमी बीमारियों के समय में जिले में चिकित्सा व्यवस्थाओं की बदहाल स्थिति देखने को मिल रही है. आलम यह है कि जिला मुख्यालय पर नगर परिषद के वार्ड के लोग ही बीमारियों से परेशान है तथा चिकित्सा महकमा इस तरफ ध्यान नहीं दे पा रहा है. शहर का हिस्सा एवं नगर परिषद के वार्ड संख्या 41 में आने वाले भोईखेड़ा गांव में एक माह में ही बुखार के बाद तीन जवान मौत हो जाने से यहां लोग सहमे हुए हैं. यहां घर-घर में बुखार के मरीज हैं. ऐसे में यहां चिकित्सा विभाग का ध्यान नहीं गया है. महकमें के जिम्मेदार कर्मचारियों ने इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई है. ऐसे में आने वाले समय में यहां वायरल बुखार गंभीर रूप ले सकता है.

चित्तौडग़ढ़ जिला मुख्यालय से मात्र दो-तीन किलोमीटर की दूरी पर शहर का ही वार्ड भोईखेड़ा गांव के नाम से पहचान रखता है. करीब पांच हजार से अधिक आबादी के इस वार्ड के लोग शहर का हिस्सा होने के बावजूद आज भी यहां गांव जैसा माहौल है. नदी किनारे बसे इस गांव के लोग मुख्य रूप से कृषि एवं सब्जी उत्पादन कर जीवन यापन करते हैं. भोईखेड़ा गांव में करीब डेढ़ माह से बीमारियां बढ़ रही है. लगातार हो रहे मौसम के बदलाव से मुख्य रूप से वायरल के रोगी बढ़े हैं. लेकिन इससे भी गांव के लोग भयभीत नहीं हुए. लेकिन एक माह में एक के बाद एक तीन जवान मौत होने के बाद ग्रामीण डर के साए में है. इन तीनों युवकों की उम्र 18 से 25 के मध्य है. इन सभी को पहले बुखार की शिकायत हुई थी. बाद में इन्हें चिकित्सालय ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान मौत हो गई. एक युवक को तो उदयपुर भी रैफर करना पड़ा था.

जानकारी में सामने आया कि भोईखेड़ा निवासी भंवरलाल पुत्र मांगू मोरी की बुखार की शिकायत के बाद 1 सितम्बर को मौत हो गई थी. वहीं गांव में रहने वाले पप्पूलाल पुत्र रामलाल भोई की 1 अक्टूबर को उपचार के दौरान मौत हुई. वहीं 18 साल के होकमचंद पुत्र भैरूलाल भोई की 10 अक्टूबर की रात उपचार के दौरान निधन हो गया. ऐसे में दो दिन से गांव के लोगों में चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. तीन मौत के बाद ग्रामीण कारणों को खोजने में जुटे हुए हैं. मुख्य रूप से बीमारी से ही मौत होना सामने आया है. इसके बाद बीमारियां बढऩे की सूचना गुरुवार को चिकित्सालय प्रशासन को भी दे दी गई थी. लेकिन शनिवार शाम तक भी कोई सुध लेने भोईखेड़ा नहीं पहुंचा है. ऐसे में जहां प्रशासन की नाक के नीचे लोगों की बुखार के बाद मौत हो रही है वहीं जिले के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा की माकूल व्यवस्था होने पर सवाल उठ खड़े हो रहे हैं.

दो के मकान एक ही मोहल्ले में

जानकारी में सामने आया कि दस दिन के भीतर जिन दो युवकों की मौत हुई है उनके मकान तो एक ही मोहल्ले में होकर आमने-सामने है. भोईखेड़ा में स्थित राम-जानकी मंदिर के सामने ही गली में दो युवकों के मन है, जिनकी मौत हुई है. पहले पप्पूलाल का निधन हुआ. वहीं 10 अक्टूबर को होकमचंद का निधन हुआ तो ग्रामीण सकते में आ गए.

किसी को टाइफाइड तो किसी को वायरल

जानकारी में सामने आया कि इन दिनों भोईखेड़ा के हर घर में कोई ना कोई सदस्य बीमार है. किसी को वायरल बुखार है तो किसी को टायफाइड हो रहा है. भोईखेड़ा निवासी एलआईसी एजेंट नारायणलाल भोई ने बताया कि हर घर में बीमारी चल रही है. बीमार होते ही लोग चिकित्सालय दौड़ते हैं. गांव के रामलाल भोई ने बताया कि ठीक होने पर घर लौटते हैं तो परिवार का कोई दूसरा सदस्य बीमार हो जाता है. कुछ घरों में दो या इससे भी अधिक सदस्य बीमार है. इधर, राधेश्याम भोई का कहना है कि उसके परिवार में भी दो सदस्यों को टाइफाइड की शिकायत है. गांव में मच्छर बढ़ रहे है लेकिन बीमारियों की रोकथाम पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है.

नीम हकीम की हो गई चांदी

गांव के लोग खेतों पर सुबह-शाम जुटे रहते हैं. ऐसे में बीमारी के लिए समय नहीं निकाल पाते. कुछ की स्थिति ऐसी है कि खेत पर नहीं जाए तो सब्जियां खराब हो जाए और आर्थिक नुकसान उठाना पड़े. ऐसे में लोग नियमित खेत पर भी जा रहे है लेकिन जिला चिकित्सालय जाने का समय नहीं मिलता. ऐसे में ये लोग गांव में ही नीम हकीम से उपचार करवा रहे हैं. बीमारी ज्यादा बढ़ जाती है तब ही जिला चिकित्सालय जाते हैं.

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