Wednesday , 26 June 2019
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अब यूके में नहीं बिक सकेंगी नकली भारतीय दवाएं

लंदन/New Delhi, 12 अक्टूबर (उदयपुर किरण). यूके की दवाइयां और हेल्थकेयर उत्पाद नियामक एजेंसी (एमएचआरए) ब्रिटेन में लाइसेंस रहित दवाओं को रोकने के लिए भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेंगी. इस महीने की शुरुआत में दिल्ली में एक बैठक के बाद, एमएचआरए भारत के राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) को खुफिया जानकारी भेजेगी, जिससे उन्हें ब्रिटेन में लाइसेंस रहित दवाएं भेजने के संदेह वाले क्षेत्रों को लक्षित करने में मदद मिलेगी. अंतरराष्ट्रीय दवा अपराध से निपटने के लिए समन्वित प्रयासों का यह एक और उदाहरण है.

New Delhi स्थित ब्रिटिश उच्चायोग के प्रवक्ता ने बताया कि भारतीय एजेंसी डीआरआई ने हाल ही में ब्रिटेन, यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों के लिए निर्धारित डायजेपाम, ट्रामडोल और ज़ोपिक्लोन जैसे शक्तिशाली दवाओं की 350,000 टैबलेट जब्त की. आपसी खुफिया-साझाकरण दवाओं में अवैध सीमा पार व्यापार का मुकाबला करने में मदद करेगा.

एमएचआरए के प्रवर्तन प्रमुख एलिस्टेयर जेफरी ने कहा कि भारतीय सरकारी एजेंसियों के साथ हमारा सक्रिय सहयोग अपराधियों को एक मजबूत संदेश भेजता है. जब हम अपने वैश्विक भागीदारों के साथ काम करते हैं तो हम अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और अभियोजन पक्ष के माध्यम से आपराधिक गतिविधियों को बाधित करने में सक्षम होते हैं. हम ब्रिटेन में लाइसेंस रहित दवाओं को लाने में शामिल सभी लोगों की पहचान करने के लिए अथक रूप से काम कर रहे हैं. भारत जैसे प्रमुख भागीदारों के साथ हमारे सहयोगी प्रयास ब्रिटेन के नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा में मदद करेंगे.

डीआरआई के अतिरिक्त महानिदेशक विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय सीमा शुल्क विभाग दवाइयों और मनोवैज्ञानिक पदार्थों के अवैध सीमापार व्यापार का पता लगाने और रोकने के लिए प्रतिबद्ध है. डीआरआई शीर्ष खुफिया और जांच एजेंसी होने के कारण हाल ही में दौरे और गिरफ्तार अपराधियों को कई मामलों में सफलता प्राप्त कर चुका है. डीआरआई अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और नियामकों के साथ मिलकर काम करता है और एमएचआरए गैरकानूनी दवाओं में व्यापार के खतरे से निपटने में एक महत्वपूर्ण भागीदार है. इस तरह के सहयोग दोनों देशों के लिए अपने नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करने और ऐसे अपराधों में शामिल अपराधियों पर मुकदमा चलाने में परस्पर लाभकारी है.

जब दवाइयों के मुद्दे के आसपास सहयोग करने की बात आती है तो यूके और भारत का एक लंबा रिश्ता है. 2015 में दोनों देशों ने दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार को लेकर समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं.

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