Tuesday , 11 December 2018
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गंगा, गाय और राम की आवाज बुलंद करने वाले हैं चुप: शंकराचार्य अद्योक्षजानंद देव

स्वामी सानंद की मृत्यु साजिश का हिस्सा, कुंभ से पहले गंगा की अविरल धारा को पहुंचाये सरकार

लखनऊ, 13 अक्टूबर (उदयपुर किरण). गोवर्धन, गंगा हमारी संस्कृति है. गंगा से हमारी पहचान है. गाय, गंगा, मंदिर पर अपनी आवाज बुलंद करने वाले आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद जैसे संगठन शांत हैं. उनके समर्थन से केन्द्र व राज्यों में सरकार चल रही हैं. गंगा की अविरल धारा और स्वच्छता के लिए आवाज उठा रहे संतों के लिए सरकार की उदासीनता समझ से परे है. यह बात जतीपुरा परिक्रमा मार्ग में पर्यावरण प्रेमी स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के अनशन के दौरान मृत्यु पर दुख जाहिर करते हुए पत्रकार वार्ता में गोवर्धन पुरी पीठ के शंकराचार्य अद्योक्षजानंद देव तीर्थ महाराज ने कही.

उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद कोई अलगाव वाद नहीं फैला रहे थे, न ही कोई अलग राज्य की मांग कर रहे थे. वह सिर्फ गंगा की अवरल धारा और उसकी स्वच्छता के लिए अनशन कर आवाज उठा रहे थे. ऐसी सरकार के द्वारा गंगा भक्त के प्रति उदासीनता बरतना गंगा भक्तों के लिए कष्टकारी है. जो सरकार गाय, गंगा, गीता और राम के नाम पर आई अब उसके चार साल बीत गये हैं. जिन्होंने स्वयं वाराणसी में कहा था कि न मैं किसी ने भेजा हूं और न किसी के कहने आया हूं. मुझे तो गंगा मां ने बुलाया है. गंगा मेरी मां है.

उनको गंगा मां के आशीर्वाद से ही देश का प्रधान सेवक बनने का अवसर मिला. गंगा भक्त की मृत्य की जांच उच्च स्तरीय कमेटी से होनी चाहिए. सरकार को अब भी जागने का मौका है. सरकार अगर कुंभ मेला से पहले गंगा की अवरल धारा नहीं कर पायी तो गंगा के प्रदूषण की आवाज अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहुंचेगी. उन्होंने ब्रज में गाय और यमुना की दुर्दशा पर जल्द से जल्द नीति बनाने को कहा. उत्तर प्रदेश सरकार गौ रक्षा नीति लागू करेगी तभी हमारी ब्रज की पहचान गाय बचेगी. यमुना नदी में में गंदे नाले गिर रहे हैं, लेकिन इस ओर सरकार का ध्यान नहीं है.

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