Wednesday , 26 June 2019
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30 साल पीछे पहुंची इनेलो, दादा ने दिखाए तेवर तो बागी हुए पौत्र

वर्ष 1987 में पार्टी बनी थी ताकतवर, लेकिन घरेलू कलह से पड़ी थी फूट

गुरुग्राम, 13 अक्टूबर (उदयपुर किरण). इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) एक बार फिर से दोराहे पर खड़ी है. पार्टी में सदा अनुशासन की बात कहने वाले इनेलो सुप्रीमो के सामने ही अनुशासनहीनता का कार्यकर्ताओं ने ऐसा परिचय दिया कि उन्होंने कठोरता दिखाते हुए अपने दो पौतों को ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. हालांकि अभी तक इस विषय में न तो इनेलो सुप्रीमो या अभय चौटाला द्वारा खुलकर बोला जा रहा है, और न ही नोटिस मिलने की बात दुष्यंत या दिग्विजय चौटाला द्वारा स्वीकारी जा रही है. अब सवाल यह उठता है कि अपने साथ हुए इस व्यवहार को लेकर ये दोनों नौजवान क्या कदम उठा सकते हैं. राजनीतिक गलियारों में इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि सांसद दुष्यंत चौटाला कोई ऐसा फैसला लेंगें, जो कि हरियाणा की राजनीति में नए आयाम स्थापित कर देगा.

ताऊ देवीलाल के जन्मदिवस के नाम पर गोहाना में आयोजित की गई रैली के बाद से इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चैटाला अपने तेवर कड़े किए हुए हैं. उन्होंने अपने दो पौतों सांसद दुष्यंत चैटाला व दिगिविजय चौटाला को पार्टी से बाहर करने के संकेत देकर यह साबित कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर और किसी भी नेता की अनुशासनहीनता पार्टी में बर्दाश्त नहीं करेंगें. उनके इस निर्णय के बाद से इनेलो दो फाड़ हो गई है. इनेलो सुप्रीमो ने इस कार्यवाही से यह संदेश तो दिया है कि अभी पार्टी में अभय का ही झंडा बुलंद रहेगा और वे खुद पार्टी को देखते रहेंगे.
वहीं अपने निष्कासन जैसी कार्यवाही को लेकर सांसद दुष्यंत चौटाला ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है. वे प्रदेश के कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात करके मंत्रणा कर रहे हैं, ताकि उन्हें अपनी जमीनी हकीकत पता चल जाए कि उनकी जमीन कितनी उपजाऊ है. यानी उनका क्या जनाधार है. शनिवार को सांसद दुष्यंत चौटाला अपने सरकारी आवास 18-जनपथ पर प्रदेश के कार्यकर्ताओं से मिले और उनका मन टटोला. दुष्यंत ने कार्यकर्ताओं के साथ भविष्य की रणनीति पर मंथन भी किया. राजनीतिक गलियारों के सूत्रों के मानें तो जल्द ही दुष्यंत चैटाला हरियाणा की राजनीति में कोई बड़ा धमका कर सकते हैं. सांसद दुष्यंत चौटाला ने अपने कार्यकर्ताओं को कोई बड़ा निर्णय करने का संकेत भी दिया है. बताते चलें कि 2002-2003 के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के बेटे अजय सिंह चौटाला ने गैर राजनीतिक संगठन जननायक सेवादल का गठन किया था. गठन के बाद से यह सेवादल निष्क्रिय था. लेकिन दुष्यंत चौटाला इसे एक्टिव कर चुके हैं.

दुष्यंत की नई पार्टी की घोषणा के भी कयास

शनिवार को दिल्ली में हुए समर्थकों के जमावड़े के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा फैल गई है कि दुष्यंत चौटाला जननायक सेवादल के नाम पर ही नई पार्टी की घोषणा कर अपने चाचा अभय सिंह चौटाला को बड़ा झटका दे सकते हैं. सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि ओम प्रकाश चौटाला ने दुष्यंत को जेल में मिलने आने के लिए भी इंकार कर दिया है. अब यह पारिवारिक इनेलो की कलह आगे कहां तक जाएगी यह तो भविष्य के गर्भ में है.

निष्कासन को लेकर बहुत गंभीर हैं दोनों भाई

पार्टी सुप्रीमो एवं दादा ओमप्रकाश चौटाला द्वारा की गई कथित कार्यवाही की वजह से पूर्व सांसद अजय सिंह चौटाला व उनके सांसद पुत्र दुष्यंत चौटाला के समर्थकों में भड़के आक्रोश के बीच अब दुष्यंत और दिग्विजय सक्रिय हो चुके हैं. दिग्विजय चौटाला भी शुक्रवार को New Delhi में प्रेस कांफ्रेंस करके इनसो को भंग करने के फैसले पर सवाल उठा चुके हैं. अब हरियाणा की राजनीति में काफी कयास लगाए जा रहे हैं. दिल्ली मेें देर रात बैठक में मौजूद रहे सूत्रों की मानें तो वर्करों के दबाव के बावजूद दुष्यंत अपने पिता अजय चौटाला से बात किए बिना कोई फैसला लेने को राजी नहीं है. सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि जननायक सेवादल के जिला पदाधिकारियों की सूची भी तैयार हो चुकी है. अब इंतजार है तो किसी बड़े धमाके का है.

बीजेपी में शामिल होने की भी है चर्चा

अपना अलग से राजनीतिक दल बनाने के साथ-साथ सांसद दुष्यंत चौटाला व उनके भाई दिगिवजय चौटाला के बीजेपी में शामिल होने के कयास भी लगाए जा रहे हैं. खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल गुरुग्राम में इस बात को हवा दे चुके हैं, जब उनसे पूछा गया कि क्या दुष्यंत चैटाला बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बात को थोड़ा घुमाते हुए कहा कि यह तो भविष्य के गर्भ में है. उन्होंने न तो सीधे हामी ही भरी और न ही इंकार किया. यानी साफ है कि दुष्यंत के लिए बीजेपी भी एक बड़ा विकल्प है. बीजेपी में अगर दुष्यंत आते हैं तो वे पार्टी में खुद को स्थापित कर राजनीति के शिखर तक पहुंच सकते हैं. हालांकि यह तो समय ही बताएगा कि वे अपना दल बनाने या फिर बीजेपी में जाने को लेकर क्या निर्णय लेते हैं.

विरोधी खेमा हो गया है सक्रिय

राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चा पर विश्वास करें तो हरियाणा में चुनाव के नजदीक आते ही भाजपा का विरोध खेमा भी एक्टिव मोड में आ गया है. सूत्रों का कहना है कि राव इंद्रजीत और भिवानी के सांसद धर्मबीर सिंह और बागी सांसद राजकुमार सैनी की तिगड़ी किसी महागठबंधन की फिराक में है. कयास लगाए जा रहे हैं कि यह तिगड़ी सांसद दुष्यंत चैटाला को अपने खेमे शामिल कर हरियाणा के सभी राजनीतिक पंडितों के समीकरण को उलट सकते हैं. सूत्रों तो यहां तक भी कह रहे हैं कि जाटलैंड के अलावा अन्य इलाकों में अब भाजपा का जनाधार खिसकता जा रहा है. ऐसे में भाजपा दुष्यंत चैटाला को मुख्यमंत्री का ऑफर देकर बड़ा फेरबदल कर सकती है.

14 साल से वनवास झेल रही इनेलो के साथ वर्ष 1987 में हुआ था ऐसा

जिस दोराहे पर इनेलो आज खड़ी है, ऐसा ही वर्ष 1987 में हुआ था. उस समय चौधरी देवीलाल के सामने अपने तीनों बेटों ओमप्रकाश चौटाला, रणजीत सिंह और प्रताप सिंह में से किसी एक को राजनीति वारिस चुनना था. उन्होंने मंत्रणा करके ओमप्रकाश चौटाला को बागडौर सौंपी. उस दौरान पार्टी को हरियाणा की 90 में से 85 सीटें मिली थी. यह आंकड़ा पार्टी में कलह का एक बड़ा कारण बना था. सरकार बनने के बाद पार्टी में मंत्रियों ने धड़ाधड़ इस्तीफे दे डाले थे. इसी बीच महम का उपचुनाव हुआ और देवीलाल परिवार महम कांड के चलते कानून पचड़े में फंस गया.

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