Tuesday , 11 December 2018
Breaking News

महाभारत काल में आद्रवन देवी के रूप में पूजी जाती थीं अदरौना की भगवती

गोरखपुर, 14 अक्टूबर (उदयपुर किरण). महाभारत कालीन ऐतिहासिक आद्रवन में स्थित पूर्वांचल के ख्याति प्राप्त मंदिरों में महराजगंज जनपद के लेहड़ा स्थित अदरौना देवी मंदिर का प्रमुख स्थान है. अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए यहां आये पांडवों ने माता की आराधना की थी. हिमालय की तलहटी में पवहिया नदी के किनारे स्थित अदरौना देवी मां के मन्दिर से हजारों वर्ष पूर्व से लोगों की आस्था और विश्वास जुड़ा हुआ है.

किवंदती के अनुसार इस शक्ति पीठ पर महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान माथा टेक कर अपने लक्ष्य की सिद्धि हेतु मां आद्रवन देवी से प्रार्थना की थी. बता दें कि मंदिर से जुड़ा घना वन क्षेत्र महाभारत काल से ही आद्रवन के नाम से जाना जाता है. अब बिगड़ते-बिगड़ते इसका नाम अदरौना हो गया है. लोक प्रचलित कथाओं के मुताबिक 1970 के दशक की शुरुआत में सिर्फ इसका गर्भगृह था. वहां पहुंचना काफी कठिन था. जंगल को पार करने को कम से कम 05-06 लोगों को इकट्ठा होना पड़ता था, लेकिन वर्ष 1959 में डॉक्टर महादेव प्रसाद सालड़ के प्रयास से चार पायों पर एक छत डाल गर्भगृह को ढका गया.

नेपाल से भी आते हैं श्रद्धालु

अब यहां एक विशाल मंदिर है. यहां पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा मित्र राष्ट्र नेपाल के भक्तों के अलावा अधिकारी व राजनेता अपनी हाजिरी लगाने आते हैं. यह सिलसिला सालों-साल चलता है. मंदिर के पुजारी की मानें तो महाभारत काल में उल्लिखित पौहारी बाबा का आश्रम इसी मंदिर के समीप था. उसका अस्तित्व आज भभूत का प्रसाद मिलने वाले स्थान के रूप में विद्यमान है.

पौहारी बाबा ने किया था माता का दर्शन

किंवदंतियों के मुताबिक पौहारी बाबा के आश्रम में मां आद्रवन साकार रूप में आती थीं. आश्रम तक जाने के लिए नदी से जाना पड़ता था. एक मल्लाह भी मां का एक भक्त था. कहा जाता है कि वृद्ध हो चुके मल्लाह की तबियत खराब होने के कारण उसका पुत्र नाव पर था. उस रात्रि माँ ने नाव की सवारी एक कन्या के रूप में किया था. मल्लाह का पुत्र नाव लेकर कुछ दूर गया तो उसकी नीयत खराब हो गई. उसने मां को साधारण कन्या समझकर स्पर्श करना चाहा तभी नाविक की बदनीयत को भांप कर देवी मां ने उग्र रूप धारण कर लिया नाव डगमगाने लगी थी. भयभीत नाविक ने मां–मां पुकारना शुरू किया, किन्तु तब तक नाव नदी में धंस चुकी थी. बावजूद इसके मां ने उसे अपनर साथ पूजित होने का आशीष दिया था. अब वह भी मां के साथ ही पूजा जाता है.

ऐसे पहुंचे यहां

गोरखपुर से बढ़नी रेलखण्ड पर लेहरा स्टेशन के निकट हिमालय की तलहटी में पवहिया नदी के किनारे माँ अदरौना का मंदिर स्थित है. गोरखपुर से सोनौली रोड पर फरेन्दा से 8 किमी की दूरी है. यहां पहुंचने के लिए निजी वाहन का उपयोग भी किया जा सकता है.

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*