Monday , 19 November 2018
Breaking News

उदयपुर एसीबी : लीक हुई फरियाद, भ्रष्टाचार के आरोपित ने फरियादी के खिलाफ दे दिया परिवाद

उदयपुर, 10 नवम्बर (उदयपुर किरण). आपको यदि किसी सरकारी विभाग की शिकायत करनी है तो भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) पर भरोसा करने के बजाय यदि आप न्यायपालिका की शरण में जाएंगे तो ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि एसीबी पर भी विश्वास करना मुश्किल हो चला है. हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है कि एक फरियादी ने परिवहन विभाग (आरटीओ) का भ्रष्टाचार खोलने के लिए दस्तावेज एसीबी को उपलब्ध कराए तो उस पर जांच शुरू होने से पहले ही इसकी भनक आरटीओ तक पहुंच गई और आरटीओ ने फरियादी के खिलाफ ही परिवाद दे दिया. इस मामले में न्यायपालिका ने एसीबी को फरियादी और दस्तावेज की सुरक्षा सहित मामले की पूरी जांच गंभीरता से करने के आदेश दिए हैं.

मामला उदयपुर आरटीओ से जुड़ा है. फरियादी एडवोकेट देवीलाल चौधरी ने अस्थायी परमिट बनाने में हो रहे खेल को उजागर करने के लिए एक काल्पनिक नाम से आवेदन किया. इस आवेदन के साथ आरसी की कॉपी, फिटनेस की कॉपी, बीमा की कॉपी, टैक्स रसीद की कॉपी आदि अनिवार्य है, लेकिन ये दस्तावेज नत्थी नहीं किए गए और जारी करने वाले ने बिना इनकी जांच के ही अस्थायी परमिट जारी कर दिया. चौधरी ने इस मामले की गहनता से जांच के लिए जोधपुर में तैनात एसीबी अधिकारी अजयपाल लाम्बा को मार्च 2018 में सूचित किया.

फरियादी चौधरी बताते हैं कि लाम्बा ने उन्हें सुझाव दिया कि ऐसे कुछ और परमिट जारी करवाकर सारा मामला राजसमंद एएसपी (एसीबी) को सौंप दें. फरियादी चौधरी ने कुछ और काल्पनिक नामों से परमिट का आवेदन किया और वे भी बिना अनिवार्य दस्तावेज की जांच के आगे बढ़ गए. राजसमंद अधिकारी के छुट्टी पर जाने के कारण लाम्बा ने उन्हें चित्तौडग़ढ़ एएसपी एसीबी को कागजात सौंपने की सलाह दी, उदयपुर से इसलिए बचा जा रहा था कि मामला उदयपुर आरटीओ ऑफिस से जुड़ा था, लेकिन चित्तौडग़ढ़ एएसपी को भी अनुमति उदयपुर एसपी एसीबी से ही लेनी पड़ती है, ऐसे में 19 जुलाई 2018 को यह फरियाद अनुमति के लिए चित्तौडग़ढ़ से उदयपुर भेज दी गई.

बस खेल यहीं से शुरू हुआ. फरियादी चौधरी का आरोप है कि यहां से कोई हलचल न होती देख उन्होंने 25 अगस्त को पत्र लिखा और 28 अगस्त को उदयपुर एसपी एसीबी से मिलने पहुंच गए. वहां जाकर पता चला कि एसपी की टेबल तक तो मामला ही नहीं पहुंचा. एसपी तेजराज सिंह ने गंभीरता से मामले को समझा और उस पर प्रक्रियागत तरीके से कार्यवाही शुरू की. लेकिन, इससे पहले कि एसीबी कोई कार्रवाई करती, उन्हीं कागजों के आधार पर आरटीओ उदयपुर की ओर से सम्बंधित थाने में फरियादी चौधरी के खिलाफ परिवाद पेश कर उन्हें ही गलत तरीके से अस्थायी परमिट प्राप्त करने के लिए आरोपित बना दिया गया. 20 अक्टूबर को फरियादी के खिलाफ परिवाद पेश होने की भनक लगते ही फरियादी चौधरी ने हाईकोर्ट जोधपुर में 24 अक्टूबर को याचिका दाखिल कर दी. 30 अक्टूबर को सुनवाई में जब न्यायालय के समक्ष सभी तथ्य आए तब न्यायालय ने सख्ती से फरियादी चौधरी को पुन: सभी दस्तावेज दस दिन में एसीबी को उपलब्ध कराने और एसीबी को भी दस दिन में इस पर कार्रवाई करने के आदेश दिए.

फरियादी एडवोकेट देवीलाल चौधरी ने एसीबी कार्यालय से उसकी फरियाद के लीक होने की जांच की भी जरूरत बताई है, उनका कहना है कि इस तरह तो देश में कोई भी फरियादी सुरक्षित नहीं है. सरकारी विभाग आपस में एक-दूसरे को बचाने का खेल करके भ्रष्टाचार को संगठित अपराध का स्थायी रूप दे देंगे. वे स्वयं एडवोकेट हैं इसलिए कानूनी मदद के प्रति सजग हैं, लेकिन यदि सामान्य व्यक्ति हो जिसे कानून की ज्यादा जानकारी नहीं हो तो उसकी फरियाद का हश्र समझा ही जा सकता है. चौधरी ने कहा कि पुलिस में परिवाद पेश होने के बाद उनसे कोई बयान नहीं लिए गए हैं, शायद उन्हें पता है कि आवेदन करने वाला तो त्रुटिपूर्ण आवेदन भी कर सकता है, जांच का विषय तो अस्थायी परमिट जारी करने वाले पर है कि बिना दस्तावेज की जांच तो दूर की बात है, बिना दस्तावेज के ही अस्थायी परमिट पर मुहर कैसे और क्यों लग जाती है. हालांकि, अब एसीबी ने यह जांच एसीबी के सीआई हनुवंत सिंह को सौंपी है.

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*