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स्थिरप्रज्ञ है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : अमर सिंह

उदयपुर, 10 नवम्बर (उदयपुर किरण). लोग पूछते हैं कि मैं सालों तक सपा में रहने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा की तरफ कैसे आकृष्ट हो गया, तो मेरा जवाब है कि यहां स्थिरप्रज्ञता है. अन्य संगठनों या राजनीतिक दलों में सुबह से शाम तक बयान तीन बार बदल जाते हैं, लेकिन यहां विचार स्थिर और स्पष्ट है.

यह बात राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने शनिवार को उदयपुर के चूंडा पैलेस में पत्रकार वार्ता के दौरान कही. वे यहां सेवा भारती चिकित्सालय के दीपावली स्नेह मिलन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आए थे. उन्होंने कहा कि कारसेवकों पर गोली, सरयू के पानी का रक्त से लाल होना, मुलायम सिंह के उस वक्त मौलाना मुलायम के नाम से सम्मानित होना, गेस्ट हाउस कांड जैसे मामलों ने उन्हें सपा से दूर किया. वोटों की राजनीति के लिए अपनी ही कही बात से पलट जाने को भी उन्होंने राजनीति के व्यवसायीकरण की उपमा दी. अमर सिंह ने कहा कि संघ के विचारों में स्थिरप्रज्ञता है और उसी वजह से वे इस ओर आकृष्ट हुए. उन्होंने कहा कि संघ के विरोधी संघ को मुस्लिम व अल्पसंख्यक विरोधी कहकर आरोपित करते हैं, यदि ऐसा होता तो संघ की ही विचारधारा वाले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रपति के पद के लिए एपीजे अब्दुल कलाम जैसे व्यक्तित्व को सामने कैसे लाते.

सांसद अमर सिंह ने कहा कि संघ राष्ट्रवाद का समर्थक है, भारत माता के हितों का समर्थक है. जो भी भारत के हित के लिए समर्पित है, संघ उसका समर्थक है. यदि संघ किसी का विरोधी है तो वह है अराष्ट्रवादी व्यक्तियों का, देश में रहकर देश विरोधी गतिविधियों को समर्थन देने वाले विचारों का. हाल ही में दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पहली बार तीन दिन तक संघ और संघ के विचार के बारे में बताने के लिए चर्चा की. अब तक संघ चुपचाप अपना काम कर रहा था. पहली बार सार्वजनिक रूप से चर्चा की गई और बताया गया कि संघ संस्कार और सेवा देने का कार्य करता है. भारत माता के प्रति समर्पित व्यक्तित्व तैयार करता है. जो गौरवशाली अतीत सुषुप्त हो रहा था, उसे समाज में जाग्रत करने का कार्य संघ करता है.

भारत का अतीत कितना गौरवशाली है इसका प्रत्यक्ष प्रमाणा दक्षिण कोरिया से हाल ही में अयोध्या आईं प्रथम महिला हैं जिन्होंने बताया कि दक्षिण कोरिया का अयोध्या से प्राचीन रिश्ता है और उनकी जड़ें यहां से जुड़ी हैं. अपने विज्ञान पुष्ट दर्शन और संस्कारों की बदौलत भारत प्राचीनकाल में विश्वगुरु था, है और रहेगा. महिलाओं के सम्मान के प्रति सामने आ रहे मामलों पर उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में डाकू जब डाका डालते थे, तब भी वे माताओं-बहनों को एक ओर कर देते थे, उनकी तरफ आंख तक नहीं उठाते थे. यह संस्कार उनमें भी थे, लेकिन बाहरी आक्रमणों जिनमें विचारधाराओं का आक्रमण भी शामिल है, उनकी वजह से संस्कारों में कुछ त्रुटियां जरूर आ गई हैं, जिन्हें ठीक करने की जरूरत है.

सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि बार-बार यह सवाल भी उठ रहा है कि शहरों के नाम क्यों बदले जा रहे हैं, तब यह कोई नहीं सोचता कि एपीजे अब्दुल कलाम और मौलाना आजाद के नाम पर जो स्थान हैं, वहां के नाम तो नहीं बदले गए. नाम सिर्फ वहां के बदले जा रहे हैं जिनका इतिहास इस देश और देश की संस्कृति को नुकसान पहुंचाने का रहा है. पिछली सरकारों ने नाम रखे, लेकिन अशफाक उल्ला खां और हमीद जैसे क्रांतिवीरों पर नाम क्यों नहीं रखे गए जो देश के लिए न्योछावर हो गए, क्योंकि वे राष्ट्रवादी मुस्लिम थे. उन्होंने कहा कि विरोधी विचारधारा के लोग भगवा रंग से नफरत करते हैं, जबकि हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज में पहला रंग भगवा है. यह रंग हमारी अस्मिता का प्रतीक है, इसका विरोध क्यों.

उन्होंने चुटकी ली कि अच्छे-अच्छे सेक्यूलर सत्ता पाने के लिए भगवा धोती पहन कर महादेव की आराधना करते नजर आ रहे हैं. यह सीधा-सीधा प्रमाण है कि देश में राष्ट्रवाद ने हुंकार भरी है, हिन्दुत्व ने हुंकार भरी है.

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