Thursday , 22 November 2018
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कांग्रेस में गहलोत और बीजेपी में राजे के पास ही है सत्ता की चाबी

उदयपुर, 10 नवम्बर (उदयपुर किरण). दिल्ली में दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के चयन को लेकर दिग्गजों के बीच भारी मंथन भले ही जारी है, लेकिन फाइनल नाम बीजेपी में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री और संगठकन महासचिव अशोक गहलोत से चर्चा और सहमति के बाद ही बाहर आ पाएंगे. सत्ता की तिलस्मी चाबी तमाम अटकल और विरोध के बाद इन्हीं नेताओं के पास है.

प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो प्रदेश भाजपा में भारी विरोध की खबरों के बावजूद आज भी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समकक्ष दूसरा नेता नहीं है. वसुंधरा की पूरे प्रदेश में व्यापक छवि के सामने ऐसा कोई अन्य नेता नहीं जो विधानसभा चुनाव में नैया पार लगा सके. यही हाल कांग्रेस का है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सीएम पद की दावेदारी का विरोध होने के बावजूद उनकी प्रदेश में कार्यकर्ताओं और जनता में लोकप्रियता कांग्रेस के दूसरे नेताओं से कई गुना ज्यादा है. ऐसे में भाजपा-कांग्रेस दोनों में केन्द्रीय आलकमान इन दोनों की सहमति के बिना अपने अपने प्रत्याशियोंं की सूची जारी नहीं करेगा.

स्क्रीनिंग कमेटी अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अधिकांश नामों को अंतिम रूप दिया जा चुका है, इन नामों पर अभी अशोक गहलोत से भी चर्चा होगी, इसके बाद आलकमान इन पर अंतिम मंजूरी देगा. वहीं बीजेपी में दिल्ल्ली से आने वाले केन्द्रीय नेताओं और प्रदेश नेतृत्व में नाम को लेकर आम सहमति नहीं है. प्रदेश में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे करीब 100 वर्तमान विधायकों के टिकट रिपीट करना चाहती है जबकि केन्द्र की इसमें सहमति नहीं है, हालांकि केन्द्रीय नेतृत्व बिना प्रदेश नेतृत्व की सहमति के सूची जारी नहीं करेगा. ऐसे में सूची में सामने आने वाले नामों में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का दखल रहेगा.

सूत्रों की माने तो दोनों दलों के आलाकमान की राय गहलोत और राजे के लिए भले ही सकारात्मक नहीं हो लेकिन अधिकांश सर्वे में गहलोत और राजे ने अपनी पार्टी में मौजूद सभी नामों को पटखनी देकर बताया कि उनकी लोकप्रियता का ग्राफ पार्टी, कार्यकर्ताओं और लोगों में कम नहीं हुआ है.

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