Friday , 14 December 2018
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आयुर्वेद से मानवता की सेवा भी तप साधना का ही परिणाम हैः सौभाग्यमुनि

भीलवाड़ा, 08 दिसम्बर (उदयपुर किरण). भीलवाड़ा जिले में श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि, मेवाड़ प्रवर्तक मदन मुनिजी आदि ठाणा का रायला से विहार कर कवंलियास जाते समय निकटवर्ती मोतीबोर का खेड़ा ग्राम में स्थित श्रीनवग्रह आश्रम में मंगल प्रवेश संपन्न हुआ. मुनि के जयघोष के बीच मुनियों के मंगल प्रवेश पर आश्रम की ओर से उनका भावभीना स्वागत किया गया.

श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि ने श्रीनवग्रह आश्रम के पूरे परिसर का अवलोकन करते हुए प्रत्येक औषधीय पौधे के बारे में आश्रम संचालक हंसराज चौधरी से पूरी जानकारी प्राप्त की तथा आयुर्वेद पर उनसे विषद चर्चा की. पूरे आश्रम परिसर का निरीक्षण करने के दौरान सनातन काल से चले आ रहे आयुर्वेद पद्वति से उपचार के बारे में आश्रम में उपलब्ध सेवाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त की.

श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि ने बाद में आश्रम में आयुर्वेद व उसके इतिहास के साथ आयुर्वेद से उपचार पर प्रवचन भी दिया. उन्होंने उदयपुर में गुरू अंबेश संस्थान में मौजूद आयुर्वेद के ग्रंथों का जिक्र करते हुए आश्रम संचालक से कहा कि वो उनका सहयोग लेकर उपचार को ओर सरल बनावें. सौभाग्य मुनि कुमुद ने कहा कि भक्ति के कई तरीके और चेहरे है. आयुर्वेद से मानवता की सेवा भी तप साधना का ही परिणाम है. कुछ लोग कपट और पाखंडपूर्ण भक्ति भी करते हैं. यह उनको लाभ की बजाय गर्त में ले जाएगा. उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा में कपटता करने पर व्यक्ति को उसका परिणाम तो भुगतना ही होगा.

सौभाग्य मुनि ने कहा कि पाखंड भक्ति बहुत खतरनाक होती है. यह दूसरों को धोखे में रखती है, लेकिन खुद को भी धोखा देती है. कपट करने वाले लोगों की भक्ति भी फलीभूत नहीं हो सकती. कई बार भक्ति साधना में व्यक्ति को अंहकार जाता है. इससे भी भक्ति दूषित हो जाती है. इस मौके पर कैंसर के उपचार के लिए तैयार किये गये नये पेंफलेट साहित्य का उन्होंने विमोचन करते हुए केंसर रोगियों के प्रति मंगलकामना भी की. आश्रम संचालक हंसराज चैधरी ने दोनो मुनियों को आश्रम का साहित्य भी भेंट किया.

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