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जैनिरक दवा न लिखने वाले डॉक्टरों पर कार्यवाही में ढील न हो : शान्ता कुमार

पालमपुर, 08 दिसम्बर (उदयपुर किरण). पूर्व मुख्यमंत्री और कांगड़ा चम्बा से लोकसभा सदस्य शांता कुमार ने कहा है कि हिमाचल सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के उन 400 डाक्टरों के विरूद्ध कार्यवाही करने का निर्णय किया है जिन्होंने आदेश का उल्लंघन करते हुए रोगी की पर्ची पर सस्ती जैनरिक दवा की बजाए महंगी ब्रांडेड दवा लिखी है. उन्होंने इस कार्यवाही के लिए हिमाचल सरकार और विशेष रूप से स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार को बधाई दी है.
उन्होंने कहा है कि इस विषय से वे कई सालों से जुड़े रहे हैं. संसद की वाणिज्य स्थाई समिति के अध्यक्ष के रूप में सरकार को इस विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट देकर यह कहा था कि यदि सरकार जेनरिक दवा लिखने की बाध्यता का नियम बना दे तो करोड़ों गरीब लोगों को फायदा हो जाएगा. पिछली कांग्रेस सरकार ने उनका सुझाव नहीं माना. नई सरकार आने पर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिल कर यह मांग रखी. प्रधानमंत्री ने सूरत में यह घोषणा कर दी कि सरकार डाक्टरों द्वारा रोगी पर्ची पर केवल जेनरिक दवा लिखने की बाध्यता का नियम बनाएगी. हालांकि कुछ स्वार्थी तत्वों के कारण अभी तक यह नियम नहीं बन पाया है.
शान्ता कुमार ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा इस विषय में प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने आश्वासन दिया है कि बहुत जल्दी सरकार यह नियम बनाएगी.
भाजपा सांसद ने कहा कि उन्होंने कमेटी की रिपोर्ट में प्रमाण सहित यह कहा था कि भारत का दवा उद्योग विश्व में सस्ती जेनरिक दवा बनाने के लिए प्रसिद्ध है. इस दृष्टि से भारत को विश्व की फार्मेसी कहा जाता है. भारत की बनी सस्ती जेनरिक दवा अमेरिका, यूरोप और यूनीसेफ भी खरीदता है. लगभग एक लाख करोड़ रुपये की दवा निर्यात होती है परन्तु भारत के गरीब लोगों को यह दवाई इसलिए नहीं मिलती क्योंकि अधिकतर डाक्टर बहुराष्ट्रीय बड़ी दवाई कम्पनियों के दबाव में कमीशन के लालच में रोगी की पर्ची पर महंगी ब्रांडेड दवा लिखते हैं.
उन्होंने हिमाचल के डाक्टरों से यह अपील की है कि महज 400 डाक्टरों के कारण प्रदेश के सभी डाक्टरों की बदनामी हो रही है. शान्ता ने सरकार से आग्रह किया है कि इस निर्णय को सख्ती से लागू करवाने में कोई कसर न रखी जाए.

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