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अदानी कंपनी के विद्युत भुगतान की जांच के लिए दो सदस्य समिति गठित

मुंबई, 08 दिसम्बर (उदयपुर किरण). अदानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लि. की ओर से ग्राहकों को नियमित रूप से दिए जानेवाले बिजली के दरों में अधिक के दर प्राप्त हुए भुगतान की जांच के लिए और उपायों के बारे में सिफारिश करने के लिए दो सदस्य समिति गठित करने का फैसला लिया गया है,यह जानकारी महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) के अध्यक्ष आनंद कुलकर्णी ने पत्रकार परिषद में दी.

इस समय पर आयोग के सदस्य मुकेश खुल्लर और आई. एम. बोहरी उपस्थित थे. इस अवसर पर कुलकर्णी ने कहा कि, मुंबई उपनगर के अदानी कंपनी के ग्राहकों को नवंबर 2018 में नियमित दरों के अलावा अधिक दरों के बिजली भुगतान प्राप्त हुऐ हैं. इस संदर्भ में प्रसार माध्यमों में प्रकाशित समाचारों की आयोग ने स्वंयप्रेरणा से जिम्मेदारी लेकर अदानी कंपनी को इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है. अदानी कंपनी के 27 लाख ग्राहकों में से लगभग 1 लाख 10 हजार निवासी ग्राहकों को 20 प्रतिशत अधिक दरों के भुगतान प्राप्त हुए हैं.

कंपनी के प्रतिनिधियों ने आयोग के सामने उपस्थित रहकर स्पष्टीकरण दिया. अक्टूबर महीने का उच्चतम तापमान और अधिक आर्द्रता के कारण ज्यादा बिजली का इस्तेमाल, पिछले भुगतान इंधन समायोजित आकारों का (एफएसी) कुछ हिस्सा इस भुगतान में से वसूल करना, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर से अदानी कंपनी को वितरित परवाना मालकी का स्थानांतरण होते समय कंपनी के कर्मचारियों ने किए हुए हड़ताल के कारण मीटर की रीडिंग उपलब्ध न होने से लगभग साढ़े तीन लाख ग्राहकों को बिजली भुगतान औसत के आधार पर भेजें गए हैं. लेकिन यह निर्धारित इस्तेमाल अक्टूबर 2018के प्रत्यक्ष मीटर रीडिंग के आधार पर समायोजित किया गया, यह स्पष्टीकरण अदानी कंपनी की ओर से दिया गया. कुलकर्णी ने कहा कि अदानी कंपनी के स्पष्टीकरण से आयोग संतुष्ट नहीं है और प्राथमिक जानकारी के अनुसार अक्टूबर के बिजली भुगतान में इस वर्ष में बड़े पैमाने पर बढोतरी हुई है यह दिखाई देता है. इसलिए अदानी कंपनी के स्पष्टीकरण की अधिक जांच करना जरूरी है. इसके लिए सूचना आयुक्त अजित जैन और तकनीकी विषय के विशेषज्ञ विजय सोनवणे इन दोनों के सदस्य समिति गठित करने का फैसला आयोग ने लिया है.

यह दो सदस्य समिति अदानी कंपनी के साथ-साथ बेस्ट, टाटा पॉवर, महावितरण जैसे अन्य बिजली वितरित अनुमति धारक की ओर से मुंबई और मुंबई उपनगर में इस समय के दौरान दिए गए बिजली भुगतान के दरों का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे. अदानी कंपनी के बिजली भुगतान में आकस्मिक रूप से हुए दर वृद्धि के कारणों को जांचने के साथ-साथ भविष्य में ऐसे प्रकार न हो इसके लिए उपायों की सिफारिश भी यह समिति करेगी. जरूरत के मुताबिक 2016-17 से लेकर अब तक के रिलांयस एनर्जी और अदानी इलेक्ट्रिसिटी कंपनी के कुल जमा स्थिति की जांच भी यह समिति करेगी. यह समिति आनेवाले दो-तीन महीने में आयोग को अपना रिपोर्ट प्रस्तुत करने की आशा है.

इससे आगे के बिजली भुगतान सही दिशा में वितरित हो इसलिए तत्काल के उपायों के तौर पर आयोग ने अदानी कंपनी को कुछ निर्देश दिए हैं. उसके मुताबिक आयोग के सितंबर 2018 के निर्देश के अनुसार अदानी कंपनी के औसतन 0.24 प्रतिशत से अधिक दरों से शुल्क न लें यह मर्यादा दी गई है. औसतन बिजली के इस्तेमाल में से15 प्रतिशत से अधिक दरों के शुल्क को लेनेवाले ग्राहकों के मीटर रीडिंग की पुनः जांच करें. साथ ही ज्यादा बिजली दरों के शुल्क को लेने की स्थिति दिखाई देने पर यह रकम नियमों के मुताबिक ब्याज के साथ ग्राहकों को वापिस करनी चाहिए अथवा आगे के भुगतान में समायोजित करनी चाहिए. संभवतः के अनुरूप अधिक से अधिक शिविरों को आयोजित करके ज्यादा दरों के बिजली भुगतानों की शिकायतों का निराकरण करें, यह निर्देश दिए हैं, इसकी जानकारी कुलकर्णी ने इस समय पर दी.

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