Monday , 17 December 2018
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पूर्वानुमानाेें के बाद अब असली नतीजों का इंतजार

भोपाल/जयपुर . पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए तमाम एग्जिट पोल के परिणाम सामने आ गए हैं. मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम चुनावों में केवल तेलंगाना पर ही तमाम एग्जिट पोल्स एक नतीजे पर पहुंचते दिख रहे हैं, बाकी जगहों को लेकर सबके अनुमान अलग-अलग हैं.

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कहीं कोई कांग्रेस को जीत दिला रहा है तो किसी को बीजेपी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है. ऐसे में इन सूबे के नेताओं की धड़कन भी बढ़ी है. नेता अब 11 दिसंबर को काउंटिंग का इंतजार कर रहे हैं. इससे पहले कोई भगवान की शरण में पहुंच रहा है तो कोई अपने आलाकमान की तरफ दौड़ लगा रहा है.

bjp-congress-leaders मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिरों पर नेताओं के दर्शन और विशेष पूजा की शुरुआत टिकट मिलने से लेकर अब तक जारी है. इन मंदिरों में पड़ोसी चुनावी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ के नेता भी मत्था टेकने आ रहे हैं. राजस्थान से खबर यह आई है कि कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य और अशोक गहलोत, दोनों ही शुक्रवार देर शाम दिल्ली पहुंच चुके हैं. वहीं वसुंधरा राजे ने अपनी बहु को एमपी में अपने लिए पूजा कराई है.

उज्जैन का महाकाल मंदिर तो नेताओं का ऑलटाइम फेवरिट रहता ही है कि एमपी में बगलामुखी मंदिर, दतिया का पीताबंरा पीठ भी चुनावी पूजाओं के लिए खास फोकस में रहता है. यहां पड़ोसी राज्यों से भी नेता आते हैं. इन मंदिरों के स्टाफ पूजा की हैवी डिमांड को लेकर बिजी हैं. इन दिनों बगलामुखी माता मंदिर में काफी भीड़ है.

यहां लोग चुनाव के लिए टिकट की कामना लेकर भी पहुंचे थे और अब चुनाव में जीत की कामना लेकर भी जा रहे हैं. यहां स्पेशल पूजा कराई जाती है. मंदिर के पुजारी आशीष ने बताया कि यहां पूजा का कोई शॉर्टकट नहीं है, सारी परंपराएं निभाई जाती हैं.

यहां कैंडिडेट की जीत के लिए 20 पंडित तकरीबन 7 घंटों तक मंत्रोच्चार करते हैं. एक दिन की पूजा का खर्च करीब 30 हजार रुपये बैठता है. उनके मुताबिक कुछ नेता देवी को खुश करने के लिए 5 दिन या उससे अधिक की पूजा की बुकिंग भी करते हैं.

उनके मुताबिक इसके अलावा एक और पवित्र पूजा है जिसे दुश्मनों को हराने के लिए किया जाता है. इस पूजा में पंडित पूरा दिन मंत्र पढ़ते हैं. पंडित के मुताबिक इसमें 60 हजार या उससे अधिक भी रुपये खर्च होते हैं. ऐसे नेता जो चुनाव में काफी व्यस्त हैं वे अपने संबंधियों को भी भेजकर पूजा कराते हैं. इसी क्रम में दो दिन पहले राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे मंदिर आ चुकी हैं. बगलामुखी माता मंदिर पहुंचने वालों में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के नेता शामिल हैं.

जैसे कृष्णा गौर और आकाश विजयवर्गीय को ही लीजिए. बाबुलाल गौर की बहु कृष्णा भोपाल में गोविंदपुर की सीट से लड़ रही हैं, वहीं कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश इंदौर-3 सीट से ताल ठोक रहे हैं. गौर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि वह टिकट मिलने से पहले और वोटिंग के बाद, दो बार बगलामुखी माता मंदिर आ चुकी हैं. आकाश विजयवर्गीय ने भी पुष्टि की कि वह मंदिर आ चुके हैं. मंदिर के पुजारियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में नेताओं की तरफ से करीब 2000 हवन कराए जा चुके हैं.

बगलामुखी माता के अलावा दतिया का पीतांबरा शक्तिपीठ और उज्जैन का महाकाल मंदिर में भी नेता पहुंच रहे हैं. बीजेपी के हैवीवेट अमित शाह, सीएम शिवराज सिंह चौहान से लेकर एमपी से कांग्रेस सांसद और सीएम रेस में शामिल सिंधिया पर पोलिंग के दौरान यहां आ चुके हैं.

अधिकतर एग्जिट पोल्स राजस्थान में कांग्रेस की मजबूत स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं. कमोबेश सभी में कांग्रेस की जीत का अनुमान जताया गया है. कांग्रेस ने इस बार राजस्थान चुनावों में प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के साथ-साथ पूर्व सीएम अशोक गहलोत को भी रणभूमि में उतारा है.

दोनों के ही कांग्रेस की तरफ से सीएम कैंडिडेट होने के दावे किए जा रहे हैं. ऐसे में वोटिंग के तुरंत बाद पायलट और गहलोत का दिल्‍ली पहुंचना सीएम पद की रेस के लिए अपनी दावेदारी पेश करने के रूप में भी देखा जा रहा है. स्वभाविक सवाल उठ रहा है कि कहीं ये दोनों नेता राजस्थान में मजबूत स्थिति को देख तो दिल्ली नहीं पहुंचे हैं.



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