Friday , 14 December 2018
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पबजी-फोर्टनाइट की लत, 2 साल में 3 गुना बढ़े गेमिंग रोगी

मोबाइल गेमिंग की गंभीर चपेट में बच्चे व बड़े भी

बेंगलुरु. बेंगलुरु के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस परिसर में शट क्लीनिक में तीन-चार बच्चे माता-पिता के साथ आए हैं. डॉक्टर के केबिन में विशाल बैठा है. डॉक्टर विशाल से पूछते हैं कि उसके कितने दोस्त हैं. वह पूछता है- ऑनलाइन या ऑफलाइन? ऑनलाइन 500 से ज्यादा, जबकि ऑफलाइन दो-तीन. विशाल ने बताया कि वह रोज 9 घंटे पबजी खेलता है. विशाल की तरह पबजी व फोर्टनाइट जैसे गेम्स की लत के शिकार तेजी से बढ़ रहे हैं.

एक दैनिक अखबार के सर्वे में यह सामने आया है कि 68% बच्चे कोई न कोई गेम खेल रहे हैं. देश में 22 करोड़ से ज्यादा गेमर्स हैं. बच्चे 14 घंटे तक मोबाइल गेम्स में बिता रहे हैं. शट (सर्विसेस फॉर हेल्दी यूज़ ऑफ टेक्नोलाॅजी) क्लीनिक के प्रो. डॉ. मनोज कुमार शर्मा कहते हैं सबसे बड़ी चुनौती तो यह होती है कि ज्यादातर केसों में बच्चे मानते ही नहीं हैं कि वे बीमार हैं. हमें वर्ष 2013 से इस बीमारी से संबंधित मरीज लगातार मिलना शुरू हुए. वर्ष 2016 में जब से इंटरनेट सस्ता हुआ है ऐसे मरीजों की संख्या में तीन गुना वृद्धि हो गई है. शेष. पेज 9
अभी सर्वाधिक केस पबजी के ही आ रहे हैं. 12 से 23 वर्ष के उम्र तक के युवा हमारे पास आ रहे हैं. प्रो. डॉ. मनोज कुमार शर्मा कहते हैं कि हर सप्ताह तीन से चार नए मरीज हमारे पास आते हैं. दवाओं के अलावा ऐसे बच्चों के इलाज के लिए 8 से 25 काउंसलिंग सेशन लेने पड़ रहे हैं. क्लीनिक की सीनियर रिसर्च फेलो अश्विनी तडपत्रिकर कहती हैं कि हमारे पास ऐसे केस भी आते हैं जिसमें बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी बंद हो जाती.

गेम की लत, स्कूल ने निकाल दिया

हैदराबाद का तेजस 12वीं का छात्र है. गेम की लत से 10वीं में नंबर कम आए. 11वीं में लत बढ़ी तो 8-10 घंटे तक पबजी व फोर्टनाइट खेलने लगा. पढ़ाई बेहतर न होने पर स्कूल ने निकाल दिया. घरवालों ने रोका तो तोड़-फोड़ करने लगा. उसका वजन भी बढ़ गया था. 25 सेशन की काउंसलिंग के बाद अब तेजस सामान्य है.

5वीं में दिया मोबाइल, गेम की लत पड़ी

सौरभ-सुमन दोनों आईटी कंपनी में काम करते हैं. 4 साल पहले 5वीं क्लास मेंे बेटे रवि को मोबाइल दिलाया. अब 15 के हो चुके रवि को एक्सपोजर मिला तो 8-9 घंटे पबजी खेलने लगा. माता-पिता भी ऑफिस से घर आते तो इंटरनेट पर समय बिताते. पहली बार जब रवि क्लीनिक पर आया तो बोला -मुझसे ज्यादा इलाज की जरूरत तो माता-पिता को है.

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