Thursday , 25 April 2019
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‘नगरे-नगरे संस्कृत भाषा-ग्रामे-ग्रामे संस्कृत भाषा’ का आह्वान

संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के लिये कुम्भनगर में मार्च
कुम्भनगरी (प्रयागराज), 12 फरवरी (उदयपुर किरण). प्रयागराज में बसे कुम्भनगरी में देश-विदेश की समाजसेवी संस्थाएं विभिन्न सामाजिक पहलुओं पर जनजागरण का कार्य कर रही हैं. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से मंगलवार को कुम्भ क्षेत्र में संस्कृत भाषा जन-जन तक पहुंचाने के लिये मार्च निकाला गया. इस मौके पर ‘नगरे-नगरे संस्कृत भाषा-ग्रामे-ग्रामे संस्कृत भाषा’ का आह्वान किया.

संस्कृत भाषा को वैज्ञानिक कसौटी पर उत्कृष्ट व अन्य भाषाओं की जननी बताते हुए संस्थान कुम्भनगर में प्रसार-प्रचार कर रही है. श्रद्धालुओं व पर्यटकों को संस्कृत के महत्व से रूबरू कराया जा रहा है. संस्थान के प्रतिनिधि व आम जनमानस हाथों में भगवा झण्डा लहराते हुए ”नगरे-नगरे संस्कृत भाषा-ग्रामे-ग्रामे संस्कृत भाषा” का आह्वान करते निकले हुए हैं.

स्वदेशी जागरण मंच में राष्ट्रीय परिषद सदस्य डॉ. सुरेश नागर चौधरी ने बताया कि पूरे देश में संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार हो रहा है. सरकार से हमारी मांग है कि संस्कृत को रोजगारपरक भाषा के तौर पर विकसित किया जाए.

सुरेश ने कहा कि संस्कृत को लेकर लोगों में अभी हीन भावना है, क्योंकि वे इसके वैज्ञानिक कारणों से अनबुझ हैं. वहीं, अनिवार्य विषय के तौर पर न होने से संस्कृत से अनजान भी हैं. लेकिन बिना संस्कृत के भारत को विश्वगुरु बनाना असंभव है. उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देना नैतिक जिम्मेदारी है. हमारी संस्कृति की पहचान हमारी संस्कृत भाषा से है.

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