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ग्रहों पर पानी है, लेकिन कॉलोनी सामाजिक प्राणी के लिए फिलहाल मुश्किल – डॉ. भारद्वाज

उदयपुर, 25 मार्च (उदयपुर किरण). इसरो के वरिष्ठ अंतरिक्ष विज्ञानी डॉ. अनिल भारद्वाज का मानना है कि ग्रहों पर पानी की उपलब्धता है, वैज्ञानिक अपनी मेहनत से उसे उपयोगी भी बना लेंगे, लेकिन अंतरिक्ष में कॉलोनी बनाकर रहना मनुष्य जैसे सामाजिक प्राणी के लिए फिलहाल मुश्किल है. डॉ. भारद्वाज सोमवार को उदयपुर के विद्या भवन में अंतरिक्ष विज्ञान पर आयोजित कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि चंद्रमा और मंगल पर पानी तो मिल गया है, अब उसे उपयोग में लेने के लिए शोध हो रहा है. अंतरिक्ष में कॉलोनी बसाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मंगल पर दस माह जाने के और दस माह आने के लगते हैं, करीब दो साल के लिए मनुष्य का आइसोलेशन (एकाकी) रहना मुश्किल है, क्योंकि मनुष्य सामाजिक प्राणी है. अंतरिक्ष में मानव पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या रहेंगे, उनका निदान क्या होगा, इन सभी बातों का जब तक जवाब तलाश नहीं लिया जाता, तब तक कॉलोनी का विकास फिलहाल मुश्किल माना जा सकता है.

अंतरिक्ष विज्ञान में भारत और भारत की प्रतिभाओं के स्थान के सम्बंध में उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व में चौथे नंबर पर है. भारतीय प्रतिभाएं आज पुन: देश में आकर देश के लिए काम करने की इच्छुक हैं. उन्होंने यह स्वीकार किया कि पहले देश में अवसरों की कमी थी, लेकिन अब अवसर और संसाधन पर्याप्त हैं. बढ़ती इंटरनेट की दुनिया के सम्बंध में डॉ. भारद्वाज ने कहा कि इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्युनिकेशन के विकास की स्पीड एक-दो-तीन नहीं बल्कि हजारों गुना बढ़ी है. किलो बाइट से आज हम टेरा बाइट की बात करने लगे हैं. डिजिटल स्टोरेज की कैपेसिटी बढ़ी है. डॉ. भारद्वाज ने यह भी कहा कि चिप निर्माण का कार्य देश में हो रहा है. भारत की सेमीकंडक्टर लेबोरेट्री इस क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रही है. अंतरिक्ष विज्ञान हो या संचार विज्ञान, इस क्षेत्र में संभावनाएं अपार हैं.

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