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डिग्रियां देने तक सीमित नहीं रहें विश्वविद्यालय- राज्यपाल कोहली

उदयपुर, 09 अप्रेल (उदयपुर किरण). विश्वविद्यालयों को सिर्फ डिग्रियां देने तक ही सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उन्हें सामाजिक उत्तरदायित्व को भी सक्रियता से संभालना होगा. यह बात गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली ने उदयपुर के जनार्दनाय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड विश्वविद्यालय राजस्थान विद्यापीठ में मंगलवार को आयोजित 11वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही. उन्होंने बताया कि राज्यों के राज्यपालों की बैठक में राष्ट्रपति एक ही बात दोहराते हैं कि यूनिवर्सिटीज में सोशल रिस्पोंसिबिलिटी का कंसेप्ट शुरू होना चाहिए. इसकी क्रियान्विति में हम शीघ्र ही यूनिवर्सिटीज में सामाजिक उत्तरदायित्व का कंसेप्ट शुरू करने वाले हैं. इसके पीछे उद्देश्य यह है कि समाज और विश्वविद्यालयों में दूरियां नहीं रहे. विश्वविद्यालय समाज के बारे में तो समाज उच्च शिक्षा के बारे में विचार करें.

राज्यपाल कोहली ने कहा कि हम स्वतंत्रता के 75 साल में प्रवेश करने वाले हैं, लेकिन आज भी हमें विकासशील देशों की श्रेणी में ही रखा जाता है. विकासशील से विकसित देशों की श्रेणी में भारत को लाने का जिम्मा हमारे युवाओं का है. दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने वाले युवाओं से उन्होंने आह्वान किया कि वे ऐसे संसाधन विकसित करें कि देश उत्तरोत्तर प्रगतिरत रहे. विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 35 विद्यार्थियों को गोल्ड मैडल से नवाजा गया. विशेष बात यह रही कि यहां बीते तीन सालों की तरह इस बार भी 23 छात्राओं ने गोल्ड मैडल प्राप्त किए जबकि छात्रों की संख्या 12 रही. राज्यपाल कोहली ने भी छात्राओं की इस उपलब्धि पर प्रशंसा की और कहा कि राजस्थान विद्यापीठ ने एकेडमिक क्षमता के बल पर नेक से ‘ए’ ग्रेड प्राप्त की है तथा महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी उपलब्धि प्राप्त की है.

दीक्षांत में विभिन्न विषयों के 50 पीएचडीधारियों को डिग्री प्रदान की गई. इनमें 12 कम्प्यूटर साइंस, 2 सोशल वर्क, 12 एज्यूकेशन, 4 पॉलीटिकल, 7 इतिहास, 4 भूगोल, 1 अर्थ शास्त्र, 1 संस्कृत, 1 हिन्दी, 3 मैनेजमेंट, 3 एकाउण्ट्स व 3 मेडिसन में पीएचडी धारक शामिल थे. समारोह में विधि आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मूलचंद शर्मा को डी-लिट की उपाधि से नवाजा गया. कार्यक्रम में राज्यपाल ओपी कोहली, कुलाधिपति प्रो एचसी पारख, कुलपति प्रो. एस.एस सारंगदेवोत व विधि आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मूलचंद शर्मा व कुल प्रमुख भंवरलाल गुर्जर ने गोल्ड मेडल व उपाधियां प्रदान की. इस मौके पर यूजीसी नई दिल्ली के पूर्व सदस्य आईएम कपाही ने कहा कि शिक्षा मनुष्य को चरित्रवान और संस्कारवान बनाती है, इसलिए वर्तमान में गुरु प्रतिष्ठा को वापस स्थापित करने की आवश्यकता है.

कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि उच्च शिक्षा में छात्राएं आगे बढ़ रही हैं, यह हर्ष की बात है. पीएचडी में उपाधि प्राप्त कर लेने के बाद भी शोधार्थियों को शोधरत ही रहना चाहिए. मूलचंद शर्मा ने कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अपने ज्ञान से देश व ग्रामीणों को शिक्षा से जोडऩे में अपनी भागीदारी निभाएं. कुलाधिपति प्रो. एच.सी. पारख ने कहा कि 1937 में स्थापित विद्यापीठ आज विश्वविद्यालय का रूप धारण कर चुकी है. एक्सचेंज प्रोग्राम के जरिए आज विदेशों के स्टूडेंट भी विद्यापीठ में अध्ययन के लिए आते हैं. समाज के हर वर्ग व छात्राओं को उच्च शिक्षा से जोडऩे में भी विद्यापीठ आगे है. समारोह में दीपशिखा राणावत, झमकू डांगी, ऐश्वर्या शर्मा, दीक्षापुरी गोस्वामी, प्रेक्षा जैन, नुपूर कुमारी, निधि शर्मा, दयावंती परिहार, मनवी शर्मा, कविता अरोड़ा, आयुषी भटनागर, पलक जैन, भावना मेनारिया, शीना वाहिद, नीलम घोघरा, तृप्ति दवे, शिवांगी सोनी, प्रीति बाला त्रिपाठी, दीशा व्यास, सोनिया राव, रंजना यादव व प्रियंका शर्मा को गोल्ड मैडल प्रदान किए गए.

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