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बदल दिया ‘धूलकोट’ का नाम, क्षेत्रवासी उतरे विरोध में

उदयपुर, 21 अप्रैल (उदयपुर किरण). उदयपुर के पुरा स्थल धूलकोट चौराहे का नाम बदल कर पीपाजी चौराहा कर दिया गया है. क्षेत्रवासियों ने उदयपुर के भाजपा बोर्ड पर इसे राजनीतिक लाभ के लिए किया गया कृत्य बताते हुए क्षेत्रवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कहा है. रविवार को सुबह इस बात को लेकर क्षेत्रवासी सड़कों पर उतर आए और चुनाव में मतदान के बहिष्कार का ऐलान कर दिया. आनन-फानन में समझाइश के लिए नेता प्रतिपक्ष और शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया मौके पर पहुंचे और चुनाव के बाद निगम की बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा करने की बात कही. क्षेत्रवासियों में इसे लेकर रोष बरकरार है. उनका सवाल है जब चुनाव है तो चुनाव के दौरान नाम बदला कैसे जा सकता है.

गौरतलब है कि धूलकोट क्षेत्र पांच हजार साल पुरानी आहड़ सभ्यता से जुड़ा क्षेत्र है जहां दो टीले पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है. यहां आहड़ संग्रहालय भी है जहां यहां उत्खनन में निकले प्राचीन सभ्यता के अवशेष संरक्षित हैं. यहां के मिट्टी के टीलों को ‘धूलकोट’ के नाम से जाना जाता है. अस्सी के दशक में जब धूलकोट के पीछे आबादी बसी और आवासीय कॉलोनियां बनीं तो यहां चार रास्ते निकले, जिनमें से एक ठोकर, दूसरा आयड़, तीसरा पहाड़ा और चौथा बोहरा गणेश मंदिर की ओर जाता है. इससे इस चौराहे का नाम ‘धूलकोट चौराहा’ रखा गया और तभी से यह ‘धूलकोट चौराहे’ के रूप में ही जाना जाता रहा है. चौराहे पर बसी कॉलोनियों की पहचान (लैंडमार्क) भी धूलकोट चौराहे से ही है.

कॉलोनियों में रहने वाले सभी लोगों ने अपने समस्त दस्तावेजों में पते में धूलकोट चौराहा ही दर्ज करा रखा है. क्षेत्रवासियों का आरोप है कि क्षेत्रवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हुए सुनियोजित तरीके से शहर के भाजपा बोर्ड ने चौराहे का नाम ‘संत श्री पीपा जी चौराहा’ रख दो दिन पूर्व यहां लगे बोर्ड पर भी लिखवा दिया. नगर निगम ने स्थानीय लोगों से किसी प्रकार की सहमति तक लेना उचित नहीं समझा और पल भर में ऐतिहासिक पहचान वाले धूलकोट के नाम से स्थापित धूलकोट चौराहे को दस्तावेजों से गायब कर देने वाला कदम उठा लिया. क्षेत्रवासियों का आरोप है कि राजनीतिक फायदे की मंशा से ऐसा किया गया है. चंद वोटों के लिए एक पुरास्थल के नाम को बदला जा रहा है. क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि शहर विधायक कटारिया ने यह तो कह दिया कि अभी चुनाव है, बाद में बोर्ड बैठक में ही कुछ किया जा सकता है, तब सवाल यह उठा कि दो दिन पहले जब बोर्ड लगाया तब चुनाव नहीं थे क्या.

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