Friday , 24 May 2019
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1952 से है राष्ट्रवाद का मुद्दा : जनरल वी.के. सिंह

उदयपुर, 24 अप्रैल (उदयपुर किरण). इस बार देश की जनता ने तय किया है कि देश में सरकार वह होनी चाहिए जो देश की तरक्की की राह पर ले जाए, कौन है जो देश का नेतृत्व बेहतर कर सकता है और पूरे विश्व में देश को मजबूत पहचान दिला सकता है. एक पान वाला भी यह विचार कर रहा है कि देश को अच्छा कौन चलाएगा. यह कहना है विदेश राज्य मंत्री सेवानिवृत्त जनरल वी.के. सिंह का. यहां उदयपुर में बुधवार सुबह प्रेस से वार्ता में उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में राष्ट्रवाद पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि राष्ट्रवाद 1952 से चुनाव में मुद्दा रहा है. सिंह ने कहा कि सेना के नाम पर कोई वोट नहीं मांगता, सेना के शौर्य की बात सभी जगह होती है. सिंह ने कहा कि क्या 1965 और 1971 के बाद चुनाव में सेना के शौर्य की बात नहीं हुई थी. सिंह ने स्पष्ट किया कि इस बार चुनाव में भाजपा के लिए विकास अहम मुद्दा है. एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी की न्याय योजना पर उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के न्यूनतम वेतनमान की परिभाषा को देखेंगे तो वह सालाना 72 हजार से अधिक है.

उन्होंने कटाक्ष किया कि जो आज न्याय की बात कर रहे हैं वे वही हैं जिन्होंने गरीबी को 30 रुपये में तोला था. सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल पर उन्होंने कहा कि फौजी कुछ करता है तो वह उसे बयां नहीं करता. लेकिन, सिंह ने समझाते हुए कहा कि एलओसी पर सेना कई कार्य करती है, हर कार्य में रिस्क होती है, जरा भी गड़बड़ हो जाए तो किसी का कॅरियर, किसी की जिन्दगी खत्म हो जाती है. लेकिन, जब एक सरकार सेना के साथ खड़ी होकर यह कहती है कि इस तरह के एक्शन पर किसी तरह के नुकसान पर सरकार साथ रहेगी, तब सेना का मनोबल और मजबूत हो जाता है. पीओके को पुनः भारत का सिरमौर बनाने के सवाल पर सिंह ने कहा कि इस कार्य के लिए समय का निर्धारण नहीं किया जा सकता, लेकिन यह तय है कि एक न एक दिन यह कार्य पूरा होकर रहेगा. हम आशावादी हैं और यह हर देशवासी की भावना है. चीन के साथ सम्बंधों पर उन्होंने कहा कि पड़ोसियों से सम्बंध अच्छे होने पर विकास बढ़ता है, यही कारण था कि 2014 में पाकिस्तान सहित सभी पड़ोसियों को न्योता दिया गया. चीन से हम नागरिक, व्यापार और निवेश के सम्बंधों को अच्छा करना चाहते हैं. चीन पाकिस्तान से दोस्ती छोड़ेगा या नहीं, यह उसका निर्णय है, लेकिन हमारा पड़ोसी होने के नाते उससे सम्बंध अच्छे हों यह हमारी विदेश नीति है.

पाकिस्तान के साथ तब तक वार्ता नहीं हो सकती जब तक कि वह माहौल नहीं सुधारता. जब तक आतंक उसकी धरती पर पनप रहा है, तब तक बात नहीं की जा सकती. अभिनंदन के लौटने को विपक्षी दलों द्वारा मोदी की उपलब्धि के बजाय जेनेवा संधि का परिणाम बताने के सवाल पर सिंह ने कहा कि जेनेवा संधि के आधार पर अभिनंदन को आने में छह माह भी लग सकते थे, लेकिन मोदी सरकार की विदेश नीति और सम्बंधों के कारण उस वक्त 40 देश हमारे साथ खड़े हो गए और अभिनंदन को पाकिस्तान को तुरंत लौटाना पड़ा. पाक में बंद अन्य कैदियों के सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी को लाने के प्रयास हर स्तर पर जारी हैं. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मोदी से ज्यादा अनुभवी होने के बयान पर किए गए सवाल पर सिंह ने कहा कि गहलोत अनुभवी हैं और उन्हें अपने अनुभव का लाभ जनता तक पहुंचाना चाहिए. वी.के. सिंह ने उदयपुर में कार्यकर्ताओं की बैठक ली और उन्होंने मोदी सरकार के कार्यों को मतदाताओं तक पहुंचाने की बात कही.

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