Saturday , 25 May 2019
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आज भी आदमी को अंतिम भरोसा न्यायालय पर, उसके बाद भगवान : चीफ जस्टिस माथुर

   

सिंघानिया लॉ कॉलेज में मूट कोर्ट का शुभारंभ, व्याख्यानमाला में न्यायिक प्रशासन-व्यवस्था व अधिवक्ताओं की विवेचना

उदयपुर. भारत में आम आदमी का अंतिम भरोसा भगवान से पहले न्यायालय पर है. यही न्यायालय व्यवस्था की सफलता है. बात, अगर बीते 70 सालों की है तो दुनिया में पब्लिक इंटरेस्ट के सर्वाधिक मामले हिंदुस्तान में ही निबटाए गए हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है. इसलिए, कहा जाता है कि जब तक समाज में न्याय के प्रति विश्वास है, तब तक समाज भी जिंदा है. यह बात इलाहबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस गोविंद माथुर ने शुक्रवार को मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय से सबंद्ध सिंघानिया लॉ कॉलेज के नवनिर्मित मूट कोर्ट के शुभारंभ अवसर पर कही.

उन्होंने सिंघानिया लॉ कॉलेज के लिए कहा कि कोई शैक्षणिक संस्था छोटी बड़ी नहीं होती है. सिंघानिया लॉ कॉलेज ने हाल ही में अपना जीवन शुरू किया है. विश्वास है कि यह कॉलेज आगामी समय में देश को कई काबिल वकील-जज देने में भूमिका निभाएगा. समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड विधि आयोग के चेयरमेन राजेश टंडन एवं राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के न्यायाधिपति रामचंद्र झाला, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य सुरेश श्रीमाली, बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य राव रतनसिंह, उदयपुर जिला व सत्र न्यायालय के कई न्यायाधीशों सहित करीब 200 जाने-माने वकील, विधिवेत्ता एवं विधि विद्यार्थी उपस्थित थे. व्याख्यानमाला से पहले हाईकोर्ट के न्यायाधिपतियों के कॉलेज परिसर में प्रवेश के साथ ही गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया तथा उसके बाद मूट कोर्ट का शुभारंभ किया गया. इस अवसर पर चीफ जस्टिस माथुर ने न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठक की. कॉलेज के प्रबंधन निदेशक डॉ. अशोक आचार्य एवं प्राचार्य डॉ. धर्मेश जैन ने अतिथियों का स्वागत किया एवं कॉलेज में संचालित लिगल एड क्लीनिक से जुड़ी जानकारियां दी.

प्रदेश में स्थितियां चिंताजनक : व्याख्यानमाला में चीफ जस्टिस गोविंद माथुर ने कहा कि राजस्थान में न्यायालयों की स्थितियां चिंताजनक है. उत्तरप्रदेश में सात सदस्यीय बैंच सिर्फ इसलिए गठित की गई है ताकि यहां पर न्यायिक प्रशासन से जुड़े लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो. ऐसा राजस्थान में नहीं है. भारत-पाक न्यायिक व्यवस्थाओं पर कहा कि, हिंदुस्तान में लोकतंत्र की जड़े बीते सत्तर सालों में मजबूत हुई है, जबकि पाकिस्तान में ऐसा नहीं हो पाया. संविधान निमात्री सभाएं दोनों में ही थी, लेकिन पाक में संविधान 73 के बाद प्रभाव में आया. यही कारण है कि विश्व में कही भी भारत जैसा लोकतंत्र और संविधान नहीं है. व्याख्यानमाला के विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड विधि आयोग के चेयरमेन राजेश टंडन ने कहा कि इस पेशे में ऐसे लोगों का आना बहुत जरुरी है जो न्याय के नाम पर आम लोगों से ठगी करने वालों पर रोक लगाए. राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के न्यायाधिपति रामचंद्र झाला ने कहा कि मूट कोर्ट स्टूडेंट्स के लिए काफी लाभकारी होता है. यह पहला कॉलेज है जहां मूट कोर्ट का आयोजन प्रथम वर्ष से ही होगा. इस हिसाब से जब स्टूडेंट अपना पाठयक्रम पूरा कर लेगा तब तक उसे प्रेक्टिकल नॉलेज की भी पूरी जानकारी होगी.

पोस्टर विमोचन व टीम घोषणा : व्याख्यानमाला के बाद सभी अतिथियों ने बाल विवाह रोकथाम अभियान पर पोस्टर का विमोचन किया. प्रबंधन निदेशक डॉ. अशोक आचार्य ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से मिलने वाले अभियानों के साथ कॉलेज हमेशा से जुड़ा रहा है. पूर्व में मतदान जागरुकता, पानी बचाओ आदि अभियान में भी कई तरह की गतिविधियां की गई. इस बार बाल विवाह रोकथाम अभियान का बिड़ा उठाया है. कॉलेज प्राचार्य डॉ. धर्मेश जैन ने बताया कि महाविद्यालय की गतिविधियां एवं विधि विद्यार्थियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण न्यायालय द्वारा कराया जाएगा उसकी एवं एडीआर की न्यायाधीश रिद्धिमा शर्मा द्वारा सिंघानिया लॉ कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्रों की अपेंटिसशिप टीम की घोषणा की गई. यह विद्यार्थी ग्रीष्मकालीन अवकाश में व्यवहारिक प्रशिक्षण न्यायालय परिसर में प्राप्त करेंगे.

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