Saturday , 25 May 2019
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आरटीई निशुल्क प्रवेश: वार्ड से बाहर रहने वाले आवेदकों पर स्कूल असमंजस में

उदयपुर, 01 मई (उदयपुर किरण). शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत लाॅटरी निकल जाने के बाद अब एक नई समस्या ने निजी स्कूलों को असमंजस में डाल दिया है. लाॅटरी में कई आवेदक ऐसे हैं जो स्कूल से सम्बंधित वार्ड के निवासी नहीं हैं, जबकि उन्होंने खुद का उस वार्ड का निवासी बताते हुए आवेदन किया है. ऐसे में स्कूलों ने शिक्षा विभाग को पत्र लिख कर मार्गदर्शन भी मांगा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है.


दरअसल, आरटीई में निःशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया में ऑनलाइन आवेदन भरने के दौरान आवेदक अभिभावकों ने अच्छे स्कूलों की चाह में खुद को उन स्कूलों से सम्बंधित वार्ड का निवासी बता दिया. लाॅटरी के बाद जब स्कूल आवेदनों की स्क्रूटनी कर रहे हैं तब यह खुलासा हो रहा है और स्कूल इस बात से परेशान हैं कि गलत सूचना देने वाले आवेदकों के कारण उन पात्र जरूरतमंदों का क्रम पीछे चला गया है जो वास्तव में स्कूल से सम्बंधित वार्ड में ही रहते हैं.


आवेदकों द्वारा की गई इस चतुराई का खुलासा होने के बावजूद निजी स्कूलों के पास स्क्रूटनी की प्रक्रिया के तहत ऐसा कोई दिशा-निर्देश आज तक नहीं दिया गया है कि वे आवेदक के निवास स्थान सम्बंधी दस्तावेज आवेदक से अनिवार्य तौर पर मांग सकें.


गौरतलब है कि आवेदक जिस वार्ड में रहता है उसे उसी वार्ड के निजी स्कूलों में आवेदन करने का नियम है और प्राथमिकता के आधार पर उसी वार्ड के निवासी को उसी वार्ड के स्कूलों में वरीयता का नियम है. अब सवाल यह उठता है कि स्कूल से दूर-दूर रहने वाले आवेदक यदि अपने बच्चों को बस या ऑटो से भेजने का खर्च वहन कर सकते हैं, तो वे फीस कैसे नहीं वहन कर सकते. साथ ही, जो वाकई पात्रता की श्रेणी में आ रहा है, वह ऐसे आवेदकों की वजह से वंचित हो जाएगा. इन सभी सवालों को लेकर शिक्षा विभाग से निजी स्कूलों ने मार्गदर्शन मांगा है.

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