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जीर्णोद्धार में अनदेखी के चलते पिछोला के घाटों से रिसाव की आशंका, सुझाव के लिए कमेटी गठित

उदयपुर, 08 मई (उदयपुर किरण). उदयपुर में स्मार्ट सिटी के तहत चल रहे कार्यों में झीलों का सौन्दर्यीकरण भी शामिल है. इसके तहत उदयपुर की प्रसिद्ध और ऐतिहासिक पिछोला झील के घाटों का भी जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है. लेकिन, इस कार्य में प्राचीन निर्माण को नुकसान पहुंचाकर नया स्वरूप देने के चक्कर में घाटों के पानी रोकने की क्षमता को और कमजोर करने की आशंका सामने आई है. शहर के जलयोद्धाओं ने झील में पानी भरते ही रिसाव की आशंका जताई है. इस बात को गंभीरता से लेते हुए जिला कलक्टर ने सर्वे के लिए जनता से जलविशेषज्ञों को मनोनीत किया है. इस टीम में नगर निगम उपायुक्त के साथ झीलों के संरक्षण के क्षेत्र में बरसों से कार्य कर रहे डॉ. तेज राजदान, डॉ. अनिल मेहता, सेवानिवृत्त सिंचाई अभियंता जी.पी.सोनी, तेजशंकर पालीवाल और जल संसाधन विभाग के अधिशासी अभियंता को शामिल किया गया है.
इस सम्बंध में डॉ. अनिल मेहता ने जिला कलक्टर को पत्र लिखकर बताया था कि झील में हो रहे कार्यों की गुणवत्ता नाकाफी है. झीलों के किनारे भूमिगत सीवर लाइन से भी सीवर रिस कर झील के अंदर तक आ रहा है. घाटों का जीर्णोद्धार मजबूती से नहीं होना और बाहर की तरफ से झील के अंदर सीवर आना झीलों पर दोहरी मार जैसा होगा और मानसून में पानी आते ही खतरा बढ़ जाएगा. डॉ. अनिल मेहता ने झीलों के कैचमेंट और छोटे तालाबों के सम्बंध में भी जिला कलक्टर को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना नहीं की जा रही है जो भविष्य में अवमानना की श्रेणी में आ सकता है. ऐसे में छोटे तालाबों के लिए भी एक कमेटी का गठन किया गया है.

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