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अन्तरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर सिटी पैलेसे में 56 फीट लम्बी फड़ प्रदर्शनी

उदयपुर, 17 मई (उदयपुर किरण). अन्तरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर सिटी महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर की ओर से पैलेस म्यूजियम आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की जानकारी के लिए तथा मेवाड़ की आकर्षक फड़ कला को प्रोत्साहन की दिशा में फड़ पेंटिंग को प्रदर्शित किया गया है. यह प्रदर्शनी जनाना महल के लक्ष्मी चौक में आगामी 10 जून तक रहेगी. शनिवार को अन्तरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर स्कूल के बच्चों के लिए सिटी पैलेस म्यूजियम में नि:शुल्क प्रवेश रहेगा. इसके लिए बच्चों को स्कूल का पहचान पत्र लाना अनिवार्य है.
मेवाड़ की फड़ चित्रकारी 700 वर्षों से भी पुरानी कला है. यह कला राजस्थान के भीलवाड़ा क्षेत्र में खूब फली-फूली. इस कला में बनाई गई चित्रकारी को पढ़-गाकर सुनाए जाने का प्रचलन रहा है, जिसमें कथावाचक द्वारा लोक देवताओं व नायक-नायिकाओं की कहानियां और किंवदंतियों का वर्णन कपड़े पर बनी फड़ कला के चित्रों को समझाते हुए करता था. शाहपुरा की पारम्परिक फड़ चित्रकारी का भारतीय कला जगत ही नहीं वरन् विदेशों में भी बोलबाला रहा है.
महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर के प्रशासनिक अधिकारी भूपेन्द्र सिंह आउवा ने बताया कि मेवाड़ के बारह सौ वर्षों के इतिहास को संक्षिप्त रूप से फड़ कला में 56 फीट लम्बे कैनवास पर उतारा गया है. इसमें भगवान एकलिंगनाथ, हारित ऋषि और बप्पा रावल के वृत्तांत को दर्शाते हुए मेवाड़ के प्रमुख घटनाक्रमों के साथ ऐतिहासिक जानकारियों वाले दृश्यों को दर्शाया गया है. इसके साथ ही 56 फीट की इस पेंटिंग में मेवाड़ के प्रथम से लेकर 76वें एकलिंग दीवान को दर्शाया गया है. महाराणा कुम्भा, महाराणा सांगा, महाराणा प्रताप और महाराणा राजसिंह के ऐतिहासिक घटनाक्रमों से यह पेंटिंग दर्शकों को पसंद आ रही है. इस पेंटिंग में प्रभु द्वारिकाधीशजी और श्रीनाथजी के आगमन को भी दर्शाया गया है. यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोगों एवं विद्यार्थियों को भी रू-ब-रू करवाना है.
फड़ चित्रकारी में प्राय: धार्मिक चित्रकारी ही होती है जो परम्परागत रूप से कपड़े या कैनवास के लम्बे टुकड़े पर बनाई जाती है. इस कला की विशेषता यह है कि इसमें काम में आने वाले रंग भी फूलों और जड़ी-बूटियों द्वारा तैयार किया जाता है जो स्वयं चित्रकार तैयार करते हंै. राजस्थान के लोक-देवी-देवताओं के कथावृत्त, अवतारों और देश के कई महानायकों के जीवन से संबंधित चित्रण भी होता है. परम्परा के अनुसार भोपा, पुजारी-गायक अपने चित्रित फड़ को अपने साथ ले जाते हैं और चित्रित लोक देवताओं, मंदिर के रूप में समझाते हुए इसकी जानकारी से रूबरू करवाते हैं. 56 फीट लम्बी इस पेंटिंग को बनाने वाले देश के ख्यातनाम कलाकार मेवाड़ के शाहपुरा निवासी अभिषेक जोशी है, जिन्हें यह कला विरासत में अपने पुरखों से मिली.
प्रदर्शनी को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 2019 पर आईसीओएम की थीम के अनुरूप बनाने का प्रयास किया गया है. इस अवसर पर फाउण्डेशन बच्चों को फड़ की आकर्षक चुनिंदा कहानियों वाली पुस्तक के साथ एक एक्टिविटी शीट नि:शुल्क प्रदान करेगा. शीट पर स्टूडेंट अपनी पसंद के चित्रों को उतार सकते हैं और अपने साथ घर ले जा सकते हैं.

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