Wednesday , 19 June 2019
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उठने लगी शैक्षणिक-सत्र एक जुलाई से लागू करने की मांग

भोपाल/हरदा, 14 जून (उदयपुर किरण). शासन स्तर पर लगने वाली शासकीय व अशासकीय शिक्षण संस्थाओं में पहले 17 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया था, जिसे भीषण गर्मी को देखते हुए बढ़ाकर 23 जून कर दिया है, लेकिन 23 जून के बाद विद्यार्थियों को गर्मी से राहत मिल ही जाएगी, इसकी संभावना भी बहुत कम है. इसीलिए अब यह मांग उठने लगी है कि क्यों न पूर्व की भांति 1 जुलाई से ही शिक्षण सत्र लागू किया जाए. यह मांग शिक्षकों द्वारा उठाई गई है.

गौरतलब है कि करीब पांच साल पूर्व प्रदेश में सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक सत्र एक जुलाई से शुरू होता था, जो अप्रैल तक चलता था. इसके बाद दो माह मई और जून में ग्रीष्मकालीन अवकाश होते थे. स्कूलों के परीक्षा परिणाम भी 30 अप्रैल तक आ जाता था. यह वह समय था, जिसमें अभिभावक से लेकर बच्चों तक प्रसन्न रहते थे. इसके बाद एक जुलाई से स्कूल खुलते थे और नए सत्र का शुभारंभ होता था. शिक्षक भी शैक्षणिक कार्यों से निवृत्त होकर दो माह में तरोताजा हो जाते थे और एक जुलाई से पुन: अध्यापन कार्य में मेहनत और लगन से जुड़ जाते थे. उसी का परिणाम होता था कि जब बच्चों का वार्षिक परीक्षा फल आता था, उसमें उनकी मेहनत नजर आती थी, पर अब ऐसा नहीं है. शासन भी व्यवस्था ऐसी हो गई कि उसमें शिक्षकों का कोल्हू का बैल बना दिया गया है.

प्रदेश सरकार द्वारा पांच साल पहले शैक्षणिक सत्र में बदलाव किया गया है. अब शैक्षणिक सत्र 15 मार्च से शुरू होता है और डेढ़ महीने स्कूल लगने के बाद डेढ़ माह का ग्रीष्मकालीन अवकाश दिया जाता है. इसके बाद जून माह की 15 से लेकर 20 तारीख पुन: स्कूल लगाना शुरू हो जाता है. इस बदलाव से अभिभावक भी परेशान हैं. इस बार बच्चों की छुट्टियां तो 23 जून तक बढ़ा दी गई है, लेकिन शिक्षकों को 15 जून से ही स्कूल जाना पड़ रहा है. भीषण गर्मी में जहां अधिकारी वातानुकूलित स्थानों पर बैठकर अपना कार्य करते हैं, वहीं शिक्षक को कहीं सर्वे का कार्य तो कहीं प्रवेशोत्सव की तैयारी और अब शिक्षकों को भारी गर्मी में घर-घर जाकर दस्तक देना पड़ रहा है, जिससे अधिकांश शिक्षक मानसिक रूप से तनाव में रहते हैं. शिक्षकों में नौकरी को लेकर मानसिक तनाव का परिणाम है कि शासकीय स्कूलों में न तो परिणाम बेहतर आ रहे हैं और न ही स्कूलों में उपस्थिति सुधार पा रही है.

जानकारों का मानना है कि बच्चों के स्वास्थ को देखते हुए स्कूल संचालित करना चाहिए. चूंकि जून के पूरे माह भीषण गर्मी का प्रकोप होता है, जिसमें बच्चे अधिकतर बीमार हो जाते हैं. वहीं इस दौरान बारिश भी आ जाती है. शुरुआती बारिश से संक्रमण होने का खतरा भी बच्चों में बना रहता है, लेकिन भारी मन से अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाते हैं. इसीलिए शिक्षक निरंतर शैक्षणिक सत्र को पूर्ववत करने की मांग करते रहे हैं. अब एक बार फिर यह मांग उठने लगी है.

इनका कहना है

अमरसिह पटेल हरदा भाजपा जिलाअध्यक्ष का कहना है कि शासन की नीति सरासर अंन्याय पूर्ण है. इस समय जून के माह में बच्चों के खेलने-कूदने के दिन होते हैं. अत: स्कूलों का शिक्षण सत्र एक जुलाई से प्रारंभ होना चाहिए.
पूर्व कांग्रेस विधायक डॉ. रामकिशोर दोगने (हरदा) का कहना है कि  जून के माह में स्कूलों का संचालन प्राकृतिक दृष्टि से भी उचित नहीं है, क्योंकि जून के अंतिम सप्ताह में आंधी-तूफान का दौर रहता है. उससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है. इसलिए एक जुलाई से स्कूल प्रारंभ होना चाहिए.

गायत्री दुबे निजी स्कूल संचालक (हरदा) कहते है कि एक जुलाई से स्कूल प्रारंभ होने से सभी विद्यार्थियों स्कूल में पहुंचे थे. उनमें अलग उत्साह दिखाई देता था और समय पर शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होती थी, लेकिन वर्तमान समय में यह अनुचित शासन को ध्यान देना चाहिए.

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