Wednesday , 19 June 2019
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एएसआई ने क्‍यों रुकवा दी सिंगरौली में खुदाई?

भोपाल . सिंगरौली में तीन महीने पहले एक रहस्यमयी नक्काशी मिली थी. इस नक्काशी में बनी तस्वीर किसी दाढ़ी वाले विदेशी व्यक्ति जैसी थी, जिसके सिर पर स्कल कैप थी. यह नक्काशी छठवीं शताब्दी के एक पत्थर में मिली थी. नायाब नक्काशी मिलने के बाद पुरातत्व विभाग ने वहां पर चल रहे खुदाई के काम को रोक दिया है. जिन पुरातत्वविदों ने इसकी खोज की, उन्हें वहां से वापस जाने को कहा गया है और उनके शोध को अनाधिकृत बताया गया है.

singrauli

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के निदेशक वीएन प्रभाकर ने खुदाई के काम को दी गई अनुमति का आदेश निरस्त कर दिया है. उन्होंने कहा कि खुदाई की अनुमति सिंगरौली जिले के टेंपल सर्वे प्रॉजेक्ट को परिदृश्य में अन्वेषण और धार्मिक वास्तुकल के पुरातात्विक अध्ययन के लिए दी गई थी. अवैध खुदाई के चलते यह अनुमति निरस्त की जा रही है.

एएसआई ने नगवा क्षेत्र में 150 साल बाद 20 से 25 स्थानीय लोगों के साथ खुदाई का काम शुरू किया था. जहां पर खुदाई प्रस्तावित थी, वहां पर कई पहाड़ों के होने का अंदेशा है. इस मामले में जांच कर रही डॉ. मधुलिका समता ने कोई भी कमेंट करने से इनकार किया है. सूत्रों की मानें तो मंदिर में खुदाई के दौरान ईंटों पर जो नक्काशी मिली है, उससे एएसआई के अधिकारी बेचैन हैं.

यह नक्काशी कलचुरी राजवंश विष्णु मंदिर की और अत्यंत दुर्लभ बताई जा रही है. परियोजना से जुड़े लोगों का मानना है कि इस खोज से इलाके में कम से कम दो हजार साल पहले के शहरीकरण की प्राचीनता का पता चला और मध्य भारत के इतिहास में नए अध्याय जोड़ने की उम्मीद थी.

विष्णु की अनोखी प्रतिमा

नाम न बताने की शर्त पर एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम की धारा-22 में पुरातात्विक अन्वेषण करने के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं है. एक पुरातात्विक अधिकारी का कर्तव्य और जनादेश है कि वह उस क्षेत्र की खुदाई करे, जहां वह मानता है कि वहां ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व के खंडहर या अवशेष हो सकते हैं और उस जगह को संरक्षित किया जा सकता है. ऐसे मामलों में पुरातत्वविद् अन्वेषण शुरू करने से पहले जिला कलेक्टर और भूमि मालिक को लिखित रूप से नोटिस देने की आवश्यकता है.

इस साइट पर दाढ़ी वाले व्यक्ति की छवि केवल आश्चर्यजनक नहीं थी. एएसआई की एक टीम को पास में प्राचीन विष्णु मंदिर मिला. यह मंदिर के गर्भगृह से निकली, जिससे सामने आया कि वह विष्णु की एक ऐसी प्रतिमा थी जो इतनी अनोखी थी कि इसके केवल कुछ ही उदाहरण मौजूद हैं. इस मूर्ति में विष्णु की कमर से सटा हुआ एक ड्रम है, जिनका बायां हाथ इस पर टिका है देखने पर ऐसा लग रहा है मानो वह इससे खेल रहे हों.

किसी शहर के अस्तित्व का संकेत

एक और दिलचस्प बात यह है कि एक दूसरे पत्थर की नक्काशी में पहली-दूसरी शताब्दी की ब्राह्मी लिपि में रा और ला लिखा मिला. यह सतह से लगभग 25 सेंटीमीटर नीचे पाया गया. इस अवधि के अवशेष लगभग 1 वर्गमीटर के क्षेत्र को कवर करते हैं. एएसआई की टीम ने चार और दबे हुए मंदिरों का पता लगाया था, जो एक बड़े शहर के अस्तित्व की ओर संकेत करते हैं.


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