Wednesday , 19 June 2019
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चमगादड़ों की मौत पर स्वास्थ्य विभाग और एनएफएल आमने-सामने

गुना, 14 जून (उदयपुर किरण). जिले के एनएफएल आवासीय परिसर में पिछले हफ्ते -10 दिन में हुई चमगादड़ों की मौत के आंकड़ों को लेकर स्वास्थ्य विभाग और एनएफएल प्रबंधन एक तरह से आमने-सामने हो गए है. जहां स्वास्थ्य विभाग का प्रथम दृष्टया मानना है कि चमगादड़ 2000 से 2500 मरे हैं, तो एनएफएल प्रबंधन ने इस आंकड़े का खंडन करते हुए संख्या 200 से 250 बताई है. दोनों विभागों की तरफ से बकायदा एक पत्र भी जारी किया गया है. एनएफएल प्रबंधन ने तो तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश न करने का आग्रह भी पत्र में किया है.
बहरहाल 2000-2500 हो या 200-250, किन्तु इतनी बड़ी तादाद में चमगादडों की मौत ने पहले से से ही कायम निपाह वायरस की दहशत को और बढ़ा दिया है. गंभीर बात यह भी है कि इतनी बड़ी तादाद में चमगादड़ों की मौत कैसे हुई? इसको लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है. पशु चिकित्सा विभाग ने रिपोर्ट आने के बाद जानकारी देने की बात कही है तो माना यह भी जा रहा है कि चमगादड़ों की मौत गर्मी से हुई होगी.

हफ्ता-10 दिन में हुई मौत चमगादड़ों की मौत

गौरतलब है कि एनएफएल के आवासीय परिसर में पिछले हफ्ते-10 दिन के अंदर बड़ी तादाद में चमगादड़ों की मौत की जानकारी सामने आई थी. स्वास्थ्य विभाग के पास खबर पहुँचने पर सीएमएचओ डॉ. पी. बुनकर ने बीएमओ राघौगढ़ डॉ. लक्ष्मी कुमार को जांच के लिए मौके पर भेजा. जिन्होने अपनी रिपोर्ट में 2000 से 2500 चमगादड़ों की मौत होने की जानकारी दी. इसके बाद सीएमएचओ खुद भी पशु चिकित्सा विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचकर वस्तु स्थिति से रुबरु हुए. सीएमएचओ डॉ. पी. बुनकर ने बताया कि उन्हे चमगादड़ों के शव नहीं मिले थे. ग्रामीणों ने बताया कि शवों को दफना दिया गया है.

तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से परिसर में भय का माहौल

मामले में शुक्रवार को एनएफएल प्रबंधन ने एक पत्र जारी किया है. जिसमें कहा गया है कि  गत 10 से 15 दिनों में तकरीबन 200 से 250 चमगादड़ों की मौत हुई है तथा चमगादड़ों की मौत की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है. इस प्रकार से मृत चमगादड़ों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से आवासीय परिसर के रहवासियों में भय का माहौल व्याप्त है. पत्र के मुताबिक एनएफएल एक केमिकल संयंत्र है और इस प्रकार के भय का माहौल व अस्थिरता संयंत्र के सुचारू परिचालन में बाधा उत्पन्न कर सकती है.

मौत का कारण गर्मी या कुछ और

चमगादड़ों की मौत के कारण को लेकर भी असमंजस बना हुआ है. प्रथम दृष्टया मौत का कारण अत्याधिक गर्मी सामने आ रहा है. कारण डॉ. बुनकर की माने तो निपाह वायरस से चमगादड़ की मौत नहीं होती है. इस बीमारी का संक्रमण चमगादड़ द्वारा कुतरे हुए फल को सूअर द्वारा ग्रहण करने पर सूअरों में फैल जाता है. मनुष्यों में यह बीमारी दुषित कच्ची ताड़ी पीने से एवं संक्रामित चमगादड़ और सूअरों के संपर्क में आने से होती है.

अलर्ट के बीच स्वास्थ्य विभाग करेगा जांच

निपाह वायरस के अलर्ट के बीच स्वास्थ्य विभाग अब एनएफएल परिसर के रहवासियों सहित आसपास के लोगों की जांच की बात कही है. जिससे इन लोगो में निपाह वायरस का संक्रमण जांचा जा सके.

हर स्तर पर बरती जा रही लापरवाही

निपाह वायरस की गंभीरता को देखने के बावजूद इस घटना में हर स्तर पर लापरवाही बरती गई है. जहां एनएफएल परिसर में इतनी बड़ी तादाद में चमगादड़ों की मौत के बाद बजाए इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग और पशु चिकित्सा विभाग को देने के बजाए मृत चमगादड़ों के या तो फिंकवा दिया गया या फिर दफना दिया गया. राघौगढ़ नगर पालिका और एनएफएल प्रबंधन दोनों में से किसी ने भी घटना की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देेना जरुरी नहीं समझा. खुद स्वास्थ्य विभाग की जानकारी में जब यह मामला आया तो उसने दो दिन पहले निपाह वायरस को लेकर अलर्ट जारी कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर दी. दो दिन में कोई कदम इसको लेकर नहीं उठाया गया.

तुरंत इलाज नहीं मिलने पर कोमा में जा सकता है मरीज

निपाह वायरस को लेकर बताया जाता है कि यह वायरस बहुत तेजी से फैलता और असर भी उतनी ही तेजी से दिखाता है. इस वायरस से पीडि़त मरीज को अगर 24 घंटे में उपचार नहीं मिलता है तो वह कोमा में भी जा सकता है. सीएमएचओ डॉ. पी. बुनकर के मुताबिक सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, जलन, सिरदर्द, चक्कर आना और बेहोश हो जाना इस बीमारी के लक्षण है.

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