Wednesday , 19 June 2019
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जन आंदोलन बनता जा रहा चिकित्सकों का आक्रोश, समर्थन में सड़कों पर उतरे हजारों लोग

कोलकाता, 14 जून (उदयपुर किरण). कोलकाता में चिकित्सकों का आंदोलन जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है. जूनियर डॉक्टरों ने अस्पताल में सशस्त्र पुलिसकर्मियों की तैनाती और हमलावरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई समेत छह मांगों को लेकर शाम 4:30 बजे से एक रैली निकालने की घोषणा की थी, लेकिन जब रैली की शुरुआत हुई तो आश्चर्यजनक रूप से इसमें न केवल सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक शामिल हुए बल्कि कानूनविद, समाजसेवी, कॉलेज के छात्र, अभिनेता, चित्रकार, गायक, कवि‌ और असंख्य साधारण लोग इस रैली का हिस्सा बन गए थे. सभी का एक ही नारा था, “चिकित्सकों को न्याय मिलना चाहिए, उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए, हमलावरों को बचाने के बजाय सजा मिलनी चाहिए.”

उल्लेखनीय है कि गत 10 जून की रात एनआरएस अस्पताल में 75 साल के मोहम्मद शाहिद नाम के रोगी की मौत के बाद दो मेटाडोर में भरकर 200 से अधिक लोग अस्पताल में घुसे और चिकित्सकों को मारा-पीटा था. हमला कितना भयावह था कि डॉक्टर परिवह मुखर्जी नाम के एक जूनियर डॉक्टर की खोपड़ी टूट गई है. हालांकि उनकी हालत सुधर रही है. दो अन्य डॉक्टरों का भी सिर फटा है. कई अन्य घायल हुए हैं. उसके बाद से चिकित्सकों ने राज्य भर में हड़ताल कर रखी है. घटना के चार दिन बाद गुरुवार को मुख्यमंत्री ने इस मामले का संज्ञान लिया था तो चिकित्सकों से बातचीत करने के बजाय उन्होंने जूनियर डॉक्टरों को हॉस्टल से निकालने की धमकी दी थी. ममता ने चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी और कहा था कि आंदोलन करने वाले डॉक्टर नहीं बल्कि बाहरी लोग हैं.

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद डॉक्टरों का रोष और अधिक बढ़ गया है. मुख्यमंत्री से माफी की मांग पर शुक्रवार को राज्य भर के विभिन्न सरकारी अस्पतालों के विभागाध्यक्षों समेत 300 से अधिक वरिष्ठ चिकित्सकों ने इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद ये सारे चिकित्सक जूनियर चिकित्सकों के साथ आंदोलन का हिस्सा बन गए हैं. शुक्रवार की रैली में दिग्गज अभिनेत्री अपर्णा सेन, मानवाधिकार कार्यकर्ता विनायक सेन, जया मित्र, कवि सुजाता भद्र, कमलेश्वर मुखर्जी, विभास चक्रवर्ती, देव ज्योति मित्रा, समीर आइच, विकास रंजन भट्टाचार्य और अनुपम राय जैसे दिग्गज लोगों ने कदमताल किया है. इन सबका कहना था कि अमीर तो कहीं भी इलाज करा लेंगे लेकिन गरीबों का सहारा सरकारी अस्पताल है. पांच दिनों से लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित होकर किस विकट परिस्थिति से गुजर रहे होंगे इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. सरकार को अहंकार छोड़कर समस्या का समाधान करना चाहिए.

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