Wednesday , 19 June 2019
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…शहीद पुताली की खट्टी-मिट्ठी यादों को लेकर रो रहे भाई, आज पहुंचेगा पार्थिव शरीर

लखनऊ, 14 जून (उदयपुर किरण). बख्शी का तालाब के भौली गांव का रहने वाला पुताली की बात सुनकर पूरा परिवार, गांव-जवार हंस देता था. आज उस गांव में मातम छाया हुआ है.वायुसेना  में अपनी सेवायें दे रहें पुताली (48) के शहीद होने की खबर पर मानों जैसे गांव विरान तो पूरा घर खाली हो गया है. घर में परिवार के लोग है, लेकिन अब कभी इस आंगन में पुताली की हंसी नहीं सुनाई देगी. अपने छोटे भाई की कुछ खट्टी-मिट्ठी यादें लेकर शहीद के दो बड़े भाईयों की आंखे रो-रोकर पत्थरा गई हैं. अब बस उन्हें अपने भाई की पार्थिव शरीर के एक झलक देखने के लिए तरस रही है कि कब सेना के जवान शहीद पुताली के शव को लेकर घर आये और उसे एक बार अपने सीने से लगा सकें.
बख्शी का तालाब के भौली गांव में रहने वाला मुन्नीलाल ने बताया कि 35 वर्ष पहले उसके माता-पिता का देहांत हो गया था. गांव में कोई पुश्तैनी खेती नहीं थी. जो जमीन थी भी वह भी सेना ने अपने आधीन कर लिया. इसके बाद मेहनत मजदूरी करके अपने भाई शिवचरन और पुताली के साथ अपने परिवार का भरण-पोषण किया. मझला भाई शिवचरन कक्षा पांच तक पढ़ने के बाद जहां भाई के साथ परिवार की जीवन यापन के लिए मजदूरी में हाथ बटाने लगे. वहीं छोटा भाई पुताली ने प्राईमरी विद्यालय में प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की. हाई स्कूल में फेल होने पर वह भी बड़े़ भाईयों के साथ मेहनत मजदूरी करने लगे. इस दौरान मुन्नीलाल ने वर्ष 2000 में एक सैन्य अधिकारी से हाथ-पैर जोड़कर भाई पुताली को वायूसेना स्टेशन में एनसी के पद पर भर्ती करवा दिया. वायूसेना में नौकरी करने के बाद पुताली 15 परिवार की जीविका का मुख्य स्त्रोत बन गए. उन्हीं के वेतन से घर का खर्च चलता था. पुताली ने शादी नहीं की थी. जबकि बड़े भाई मुन्नीलाल के एक बेटा कमलेश है तो वहीं शिवचरन के चार बेटे, दो बेटियां है. सभी शादी के लायक है, ऐसे में भाई के गुजर जाने से पूरे परिवार में मानो एक पहाड़ टूट गया है. चार जून को शहीद होने की खबर मिलने के बाद आज करीब दस दिन बीत चुके है, लेकिन किसी ने अभी तक एक अन्न का दाना नहीं खाया है. बस उनकी एक ही मांग है कि जल्द ही पुताली के पार्थिव शरीर को गांव लाया जाये.
सेना के जानकारी देने से पहले मिल गई थी मौत की खबर
 
मुन्नीलाल के भतीजे बसंतलाल ने बताया कि उनका भाई सोनू भी श्रीनगर में एयरफोर्स में तैनात है. तीन जून को हुई विमान दुर्घटना में शहीद हुए चाचा के मरने की खबर सोनू ने फोन पर सबसे पहले दी थी. इसके बाद वायुसेना के अधिकारियों ने परिवार को फोन पर पुताली के शहीद होने की खबर दी.
शनिवार को आ सकता है पुताली का पार्थिव शरीर
 
भतीजा कमलेश ने बताया कि चाचा के पार्थिव शरीर को गांव लाने के लिए जब वायुसेना के अधिकारी से बात की तो उन्होंने यह बताया कि अभी तक उन्हें ही शहीदों के शव नहीं मिले हैं. उम्मीद है कि शनिवार दोपहर तक शव गांव पहुंच जायेगा, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जायेगा.
नौकरी की मांग करेगा परिवार 
 
भाई मुन्नीलाल का कहना है कि 15 परिवार के पालन-पोषण का जिम्मा छोटे भाई पुताली पर ही था. अब उसके शहीद होने पर घर की माली हालत बिगड़ जायेगी. उनकी सरकार से मांग है कि घर के एक सदस्य को नौकरी दी जाये ताकि उनके परिवार का जीवन यापन हो सकें. हालांकि एसडीएम बख्शी तालाब से परिवार को यह आश्वासन मिला है कि सरकार से आर्थि सहायता के लिए 20 लाख रुपये दिए जायेंगे. जो दोनों भाई के नाम दस-दस लाख रुपये होंगे.
वायुसेना ने अधीन कर लिया 36 बीघा जमीन
 
ग्रामीणों का कहना है कि मतदाता सूची के मुताबिक भौली गांव में सात हजार परिवार रहता है. जबकि संख्या दस से 15 हजार है. आरोप है कि वायु सेना ने इस गांव की करीब 36 बीघा जमीन अपने आधीन कर ली है.
अंतिम संस्कार के तैयारी में जूटा प्रशासन 
 
शहीद का पार्थिव शरीर के आने का इंतजार गांव के लोग बेसबरी से इंतजार कर रहे है. तो वहीं अंतिम दर्शन के लिए कई मंत्रियों, विधायक व प्रशासनिक अधिकारियों के आने की उम्मीद है. इसके लिए ग्राम पंचायत के लोग शुक्रवार को परिवार से मिलकर अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटा हुआ है. गांव में शहीद के घर आने के लिए चूने का चिन्ह बनाएं है, ताकि कोई भटके न.

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