Tuesday , 16 July 2019
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बसुआ के पास ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना पथ ध्वस्त, दर्जनों गांवों का टूटा सम्पर्क

सुपौल,13 जुलाई (उदयपुर किरण). रेल महासेतु के पास गाईड बांध सटाकर श्रमदान से बनाये गये 600 मीटर लंबे सुरक्षा बांध के शुक्रवार रात टूटने से महज 20 घंटे में ही सूखा दिखने वाले गांव में अब पानी ही पानी है. कई गांवों  में पानी घुसने  से लोगों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं  जबकि बसुआ के पास ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना पथ पानी के  तेज वेग में ध्वस्त हो गया है जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है.
नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बाद कोसी नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से तटबंध के अंदर बसे गांव, घुरन, बलवा, तेलवा, मरौना के घोघरिया, सिसौनी, सरायगढ़ के लौकहा, बनैनिया, किशनपुर का नौआबाखर, भेलवा सहित अन्य गांवों में पानी घुस जाने से लोगों की समस्या बढ़ गयी है. लोग गांव छोड़ अपने माल-मवेशी के साथ ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं.
ग्रामीण मो. नैयर ने बताया कि कल तक जहां एक बूंद पानी नजर नहीं आ रहा था आज अचानक पानी बढ़ जाने के बाद तटबंध के अंदर बसे गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. लोग नाव के सहारे एक जगह से दूसरी  जगह जाने को विवश हैं. लोग निजी नाव के सहारे एक बगल से दूसरे बगल आ जा रहे थे. बुजुर्ग महादेव सादा ने बताया कि पिछले 10 साल में कोसी की  यह स्थिति नहीं देखी  थी  जिस तरह इस बार दिखायी दे रही  है.
दो करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से हो रहा था सड़क निर्माण
भुराही नरहैया से बसुआ फाटक तक ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के तहत 2 करोड़ 26 लाख 76 हजार 684 रुपये की लागत से इस सड़क का निर्माण कराया जा रहा था. दो किमी लंबी इस सड़क के बन जाने से इस इलाके के लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी लेकिन शनिवार को अचानक कोसी नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि के बाद यह सड़क लगभग आठ जगह ध्वस्त हो गयी  जिससे पानी की तेज धारा बहने लगी है. हालांकि इसे बचाने के लिए अब भी प्रयास हो रहा है लेकिन कोसी के वेग के आगे इसे बचाना अब मुमकिन नहीं लगता है.
इस साल के  सबसे अधिकतम जलस्तर पर पहुंची कोसी
नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बाद कोसी नदी का जलस्तर भी काफी तेजी से बढ़ने लगा है. जलस्तर में हो रही वृद्धि को देख प्रशासन की बेचैनी भी बढ़ गयी है. शनिवार की शाम तक कोसी नदी का जलस्तर इस साल का सबसे अधिक मापा गया. कोसी बराज पर जहां 2 लाख 88 हजार 895 क्यूसेक पानी बढ़ते क्रम में मापा गया वहीं बराह क्षेत्र में 2 लाख 56 हजार 50 क्यूसेक पानी घटते क्रम में मापा गया.

 

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